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Sehore: हजारों लीटर दूध से किया अभिषेक, मंदिर से बह निकली धारा; बारहखंभा मेले में उमड़ी आस्था की भीड़

Sat, 02 Nov 2024 07:58 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सार

Sehore: सीहोर में प्रदेश के सबसे बड़े इस एक दिवसीय मेले में लाखों लोगों ने अपने पशुधन के सलामती की दुआ मांगते हुए आदिवासी आराध्य देव की पुरातन शिला को सैकड़ों लीटर दूध से नहलाया। 
 
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मेला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सीहोर जिले से 34 किमी दूर ग्राम देवपुरा की धरा पर शनिवार को एक बार फिर आस्था से ओतप्रोत दूध की धारा बह निकली। प्रदेश के सबसे बड़े इस एक दिवसीय मेले में लाखों लोगों ने अपने पशुधन के सलामती की दुआ मांगते हुए आदिवासी आराध्य देव की पुरातन शिला को सैकड़ों लीटर दूध से नहलाया।

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मेला स्थल तक पहुंचने के लिए तीनों प्रमुख मार्गों पर करीब तीन-तीन किमी तक वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दी। मेले में जिस संख्या में लोग पहुंचे, उससे पिछले एक दशक का रिकार्ड टूट गया। व्यापारियों ने लाखों रुपए का व्यापार किया। वहीं प्रशासनिक व्यवस्था भी चाक चौबंद रही।

इछावर तहसील के देवपुरा गांव में बाराखम्बा (बारह खम्बा) मंदिर पर दीपावली के दूसरे दिन यानि की पड़वा (इस बार 2 नबंवर) पर प्रदेश का सबसे बड़ा मेला आयोजित हुआ। वहां स्थित आदिवासी आराध्य देव पशुपतिनाथ की शिला पर दूध चढ़ाने वालों की भीड़ सुबह 6 बजे से ही एकत्रित हो गई थी। जैसे-जैसे समय बढ़ता गया। मेले में श्रद्वालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। दोपहर 12 से 2 बजे के बीच मेला अपने पूरे शबाव पर था।

मवेशियों की सलामती को लेकर शनिवार को लाखों की संख्या में श्रद्धालु बारह खंभा मेले में पहुंचे। इस दौरान पशु पालकों ने भगवान पशुपति नाथ के दर्शन कर उनकी प्रतिमा का दूध से अभिषेक किया। इससे दूध की धारा बहने लगी। दीपावली के एक दिन बाद पड़वा को एक दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र सहित दूर दराज गांव और शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करने एवं दूध चढ़ाने पहुंचे थे।

नहीं फैलता है संक्रामक रोग

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श्रद्धालु और पशुपालकों की आस्था है कि भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा पर दूध चढ़ाने से मवेशियों में कोई भी संक्रामक रोग नहीं फैलता है। मवेशी अधिक दूध देने के साथ ही निरोग रहते हैं। इसके अलावा कई लोग अच्छी पैदावार के लिए गन्ने सहित अन्य फसल भी मंदिर में चढ़ाते हैं।

राजगढ़ जिले के गांव सुठालिया से मेले में आए महेश माहेश्वरी ने बताया कि करीब 5 साल पहले दोस्तों के साथ मेले में आया था। इस दौरान कुछ मन्नत मांग कर गया था। यह मन्नत कुछ समय में ही पूरी हो गई। इसके बाद से ही हर साल मेले में भगवान के दर्शन करने आता है।

एक दिन में होता है लाखों का व्यापार 
बारह खंभा मेला पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा होता है। यहां इछावर, आष्टा, सीहोर नसरूल्लागंज,देवास सहित आसपास जिलों के सैकड़ो व्यापारी अपनी विभिन्न दुकाने लेकर  पहुंचते है। स्थिति यह होती है कि एक दिन में ही लाखों रुपए का व्यापार हो जाता है। मेले में आने वाले श्रद्धालु जमकर खरीदी भी करते हैं।

कई किमी तक लगी वाहनों की कतार
मेला स्थल पर पहुंचने वाले खेरी, गादिया, दीवड़या मार्ग पर कई किमी तक वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दी। कच्चें और उचड़-खाबड़ मार्ग और उन पर उड़ते धूल के गुब्बार श्रद्धालुओं की आस्था के आगे बोने दिखाई दिये। मेले में शामिल होने के लिए बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं हजारों की संख्या में पहुंचे।

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