सीहोर जिले से 34 किमी दूर ग्राम देवपुरा की धरा पर शनिवार को एक बार फिर आस्था से ओतप्रोत दूध की धारा बह निकली। प्रदेश के सबसे बड़े इस एक दिवसीय मेले में लाखों लोगों ने अपने पशुधन के सलामती की दुआ मांगते हुए आदिवासी आराध्य देव की पुरातन शिला को सैकड़ों लीटर दूध से नहलाया।
मवेशियों की सलामती को लेकर शनिवार को लाखों की संख्या में श्रद्धालु बारह खंभा मेले में पहुंचे। इस दौरान पशु पालकों ने भगवान पशुपति नाथ के दर्शन कर उनकी प्रतिमा का दूध से अभिषेक किया। इससे दूध की धारा बहने लगी। दीपावली के एक दिन बाद पड़वा को एक दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्र सहित दूर दराज गांव और शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन करने एवं दूध चढ़ाने पहुंचे थे।
नहीं फैलता है संक्रामक रोग
एक दिन में होता है लाखों का व्यापार
बारह खंभा मेला पूरे क्षेत्र का सबसे बड़ा होता है। यहां इछावर, आष्टा, सीहोर नसरूल्लागंज,देवास सहित आसपास जिलों के सैकड़ो व्यापारी अपनी विभिन्न दुकाने लेकर पहुंचते है। स्थिति यह होती है कि एक दिन में ही लाखों रुपए का व्यापार हो जाता है। मेले में आने वाले श्रद्धालु जमकर खरीदी भी करते हैं।
कई किमी तक लगी वाहनों की कतार
मेला स्थल पर पहुंचने वाले खेरी, गादिया, दीवड़या मार्ग पर कई किमी तक वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दी। कच्चें और उचड़-खाबड़ मार्ग और उन पर उड़ते धूल के गुब्बार श्रद्धालुओं की आस्था के आगे बोने दिखाई दिये। मेले में शामिल होने के लिए बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं हजारों की संख्या में पहुंचे।