सिंधी समाज के लोग जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और संपन्नता की कामना के लिए वरुण देवता की पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि उपासक भगवान झूलेलाल को उदेरोलाल, घोड़ेवारो, जिन्दपीर, लालसाँई, पल्लेवारो, ज्योतिनवारो, अमरलाल आदि नामों से भी पूजते हैं।
हर साल की तरह इस साल भी सिंधी समाज के तत्वाधान में भगवान झूलेलाल जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर के सिंधी कालोनी स्थित झूलेलाल मंदिर में हुए भव्य कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सिंधी समुदाय के अलावा अन्य समाज के लोग शामिल हुए। सुबह पूरे विधि-विधान से अखंड पाठ की समाप्ति की गई। इसके बाद भजन कीर्तन किया गया। भजन कीर्तन के बाद झूलेलाल के जयकारे लगाते हुए शोभायात्रा निकाली गई। भगवान झूलेलाल का विशेष शृंगार किया गया और भोग लगाया गया। मंदिर में खास तौर से सजावट की गई। इसके पीछे एक वाहन पर भगवान झूलेलाल स्थापित किया गया। इस दौरान प्रसाद बांटा गया। जगह-जगह श्रद्धालु ने भगवान झूलेलाल के दर्शन किए।
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हर साल की तरह इस साल भी सिंधी समाज के तत्वाधान झूलेलाल का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया था। इस मौके पर शाम छह बजे भव्य चल समारोह शहर में निकाला गया। इसके बाद मंदिर परिसर में प्रसादी का वितरण किया गया। गुरुवार की सुबह मंदिर परिसर में जारी अखंड पाठ साहब का समापन किया गया। इसके बाद दोपहर में भजन आदि का आयोजन किया।
सिंधी समाज के अध्यक्ष रमेश आहूजा ने बताया कि चेटी चंड का त्योहार हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। चेटी चंड का पर्व सिंधी समुदाय का एक प्रमुख त्योहार है। सिंधी समाज के लोग चेटी चंड के मौके पर अपने आराध्य देवता भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में बड़े ही उत्साह और जोश के साथ मनाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान झूलेलाल जल के देवता वरुण हैं। इस मौके पर सिंधी समाज के लोग जीवन में सुख-समृद्धि, वैभव और संपन्नता की कामना के लिए वरुण देवता की पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि उपासक भगवान झूलेलाल को उदेरोलाल, घोड़ेवारो, जिन्दपीर, लालसाँई, पल्लेवारो, ज्योतिनवारो, अमरलाल आदि नामों से भी पूजते हैं।
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भगवान झूलेलाल को जल और ज्योति का अवतार माना गया है। इसलिए लकड़ी का मंदिर बनाकर उसमें एक लोटे से जल और ज्योति प्रज्वलित की जाती है और इस मंदिर को श्रद्धालु चेटीचंड के दिन अपने सिर पर उठाते हैं, जिसे बहिराणा साहब भी कहा जाता है। इसको लेकर श्रद्धालु पूरी आस्था के साथ पवित्र नदी में विसर्जित करते है। गुरुवार की शाम को शहर के सीवन नदी तट महिला घाट पर चल समारोह के रूप में श्रद्धालुओं के द्वारा आरती की और ज्योति का विसर्जन किया गया। गुरुवार सुबह से ही शहर के सिंधी कालोनी स्थित झूलेलाल मंदिर में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, इनकी उपस्थित में भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव चेटी चंड मनाया गया और सभी ने एक दूसरे को पर्व की बधाई दी। देर शाम को भव्य रूप से चल समारोह निकाला गया। इस दिन सभी सिंधी समाज के लोगों ने अपने-अपने व्यापारी प्रतिष्ठान बंद रखे थे।