गौरतलब है कि सिंधिया खेमे के 22 में से छह विधायक कमलनाथ सरकार में मंत्री थे। इनमें से दो पहले ही कैबिनेट में शामिल हो चुके हैं। सिंधिया ने आठ और नाम कैबिनेट के लिए सौंपे हैं। इनमें कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें मंत्री बनाने पर भाजपा को अपने कद्दावर नेताओं की अनदेखी करनी होगी। ऐसे में असंतोष का डर है।
नेतृत्व नहीं चाहता कि ऐसे समय पार्टी में फूट पड़े जब जल्द ही उपचुनाव हैं। गौरतलब है कि रविवार से ही राजधानी में डटे शिवराज ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृहमंत्री अमित शाह और सिंधिया के साथ लगातार बैठकों के बाद सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी।
इस क्रम में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए सिंधिया को जल्द ही कैबिनेट में जगह देने का आश्वासन मिला है। सूत्रों का कहना है कि सिंधिया ने रेल मंत्रालय की इच्छा जताई है। नेतृत्व ने उनसे कहा है कि राज्यसभा के नवनिर्वाचित सांसदों की शपथ के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा।