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MP News: फर्ज के लिए खेला जिंदगी का दांव, गर्दन तक भरे पानी में उतरे कर्मचारी, 33KV की लाइन सुधारी; तस्वीरें

Tue, 02 Sep 2025 07:12 PM IST
सतना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना

सार

सतना जिले में 33 केवी सोहावल लाइन में फॉल्ट होने पर बिजली कर्मचारियों ने जान जोखिम में डालकर इंसुलेटर बदले और बिजली आपूर्ति बहाल की। उनके इस साहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
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बिजली सुधारते हुए कर्मचारी
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विस्तार
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कहते हैं, मुश्किल हालात में ही असली परख होती है। सतना जिले में बिजली कर्मचारियों ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा और साहस से यह साबित कर दिया है। सितपुरा क्षेत्र में सोमवार शाम 33 केवी सोहावल विद्युत लाइन में फॉल्ट होने से आपूर्ति ठप हो गई थी। समस्या यह थी कि जिस स्थान पर फॉल्ट हुआ, वहां पानी भरा था। इसके बाद भी कर्मचारी जान जोखिम में डालकर पानी में उतरे और फिर इंसुलेटर बदले। जिसके बाद कई घंटों से प्रभावित बिजली सप्लाई बहाल हो सकी। अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, कर्मचारियों के काम की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक, सतना के सोहावल में सोमवार को भीषण बारिश और बिजली गिरने से 33 केवी सोहावल लाइन में फॉल्ट आ गया। ग्रामीण प्रथम उपसंभाग की टीम तुरंत सक्रिय हुई और लाइन की पेट्रोलिंग की। बागरी पेट्रोल पंप के पीछे सितपुरा रोड पर दो विद्युत पोल में इंसुलेटर फेल पाया गया। मुश्किल यह थी कि ये पोल बांध के अंदर थे। कर्मचारियों के पास उसे सही करने का कोई और रास्ता नहीं था। ऐसे में उन्होंने पानी में उतरकर लाइन सही करने का फैसला किया। कर्मचारी पानी में उतरे तो वे गर्दन तक उसने डूब गए, सिर्फ उनके सिर ही पानी से बाहर नजर आ रहे थे। पानी के बीच से गुजरते हुए कर्मचरी खंभे के पास पहुंचे और बिजली आपूर्ति बहाल की। 

खुद को गर्दन तक पानी में डुबोकर लाइन सही करने वालों में बिजली कर्मचारी राजा सेन, चंद्रिका कुशवाहा, गया कुशवाहा, रामलाल कुशवाहा और रचित दाहिया  शामिल हैं। इनके उनके साहस की बदौलत प्रभावित क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी। इस बहादुरी भरे कार्य में परीक्षण सहायक जितेंद्र विश्वकर्मा और लाइन कर्मचारी राजभान कोरी ने भी अहम योगदान दिया। सभी कर्मचारियों ने मिलकर घंटों की मेहनत के बाद अंधेरे में डूबे गांव में उजाला पहुंचाया।   
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साबित किया कर्म ही सेवा है
ग्रामीणों और विभागीय अधिकारियों ने कर्मचारियों की हिम्मत और जिम्मेदारी को सलाम किया है। ग्रामीणों का कहना है कि इन बिजलीकर्मियों की बदौलत अंधेरे में डूबे गांवों में फिर से उजाला लौटा। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि सच्ची लगन और कर्तव्यनिष्ठा के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। कहते हैं न, कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता, बस करने का हौसला होना चाहिए।
 

 

 

 

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