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Satna News: पार्षदों के अचानक लापता और भाजपा में शामिल होने पर भड़की कांग्रेस, लगाए कई आरोप

Fri, 13 Sep 2024 05:22 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सतना

सार

बुधवार को कांग्रेस पार्टी की दो पार्षद अचानक गायब हो गई थी और गुरुवार को गायब हुईं दोनों महिला पार्षदों ने भोपाल में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, जिसको लेकर कांग्रेस ने सतना में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।
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कांग्रेस नेता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सतना में राजनैतिक पारा इन दिनों काफी हाई चल रहा है। नगर निगम स्पीकर के अविश्वास प्रस्ताव को लेकर हुआ बवाल अब व्यापक रूप ले चुका है। पार्षदों के अचानक गायब हो जाने और उनके भाजपा में शामिल होने के बाद से भाजपा के ऊपर भड़की कांग्रेस पार्टी ने पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के ऊपर तरह-तरह के आरोप लगाए हैं।

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दरअसल, बुधवार को कांग्रेस पार्टी की दो पार्षद अचानक गायब हो गई थी और गुरुवार को गायब हुईं दोनों महिला पार्षदों ने भोपाल में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली, जिसको लेकर कांग्रेस ने सतना में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।

भाजपा ने पार्षदों का किया है अपहरण
दोनों महिला पार्षदों के भाजपा में शामिल होने के बाद  सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा भाजपा ने कांग्रेसी पार्षदों का अपहरण किया है। उन्हें डरा कर प्रलोभन देकर ले जाया गया है। साथ ही उन्होंने सवाल भी उठाया की यदि उन्हें सदस्यता दिलानी ही थी तो महिला पार्षदों को भोपाल क्यों ले जाया गया? मिस्ड कॉल पर सदस्य बना रही भाजपा क्या उनसे सतना में ही उनके घर पर मिस्ड कॉल नहीं करवा सकती थी? यह लोकतंत्र के दमन और बदहाली से परेशान शहर की जनता की आवाज को दबाने की साजिश का हिस्सा है। विधायक जी ने यह भी कहा भाजपाई भयभीत है, क्योंकि उन्हें पता है कि फ्लोर टेस्ट में उनकी हार सुनिश्चित है, इसलिए ऐसे हथकंडे अपना रही है।
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रावेंद्र सिंह मिथिलेश ने कहा की संख्या बल कम भले नजर आता हो। लेकिन जब फ्लोर टेस्ट होगा तो जीत कांग्रेस की ही होगी। क्योंकि सिर्फ कांग्रेसी ही नहीं भाजपाई पार्षद भी असंतुष्ट हैं। आवेश राजनीतिक महासंग्राम का परिणाम क्या होने वाला है यह बताना तो मुश्किल है। परंतु यह प्रक्रिया काफी दिलचस्प नजर आ रही है। दोनों पार्टियों के द्वारा एक के बाद एक दाव पेंच खेले जा रहे हैं। अंत में देखना यह होगा कि किसके हाथों लगती विजय और किसके हाथों निराशा?

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