शादी-पंडाल से गौशाला तक पहुंचा फोगर सिस्टम
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मध्य प्रदेश के सागर जिले से एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां ग्रामीण महिलाओं ने अपनी सूझबूझ और संवेदनशील सोच से गौशाला में रह रही गायों को भीषण गर्मी से राहत दिलाने का अनूठा तरीका अपनाया है। शादियों और राजनीतिक सभाओं में वीआईपी मेहमानों को ठंडक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘फोगर सिस्टम’ का उपयोग अब गायों को गर्मी से बचाने के लिए किया जा रहा है। महिलाओं की इस पहल की पूरे जिले में चर्चा हो रही है।
सभा में देखा फोगर सिस्टम, फिर आया आइडिया
यह मामला सागर जिले के राहतगढ़ विकासखंड के ग्राम सिहोरा का है। यहां ‘सरगम स्वयं सहायता समूह’ की महिलाएं ‘गोकुल गौशाला’ का संचालन कर रही हैं। गर्मी बढ़ने के साथ जब गौशाला में मौजूद गायें परेशान होने लगीं, तब महिलाओं ने समाधान तलाशना शुरू किया। इसी दौरान महिलाओं ने एक सार्वजनिक सभा में फोगर सिस्टम लगा देखा, जो लोगों को गर्मी से राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। बस यहीं से उन्हें नया विचार आया। महिलाओं ने तय किया कि इसी तकनीक का इस्तेमाल गौशाला में भी किया जाएगा, ताकि गायों को भी ठंडक मिल सके।
फोगर से गायों को मिल रही एसी जैसी ठंडक
महिलाओं ने गौशाला में फोगर सिस्टम लगवा दिया। अब यह मशीन बारीक पानी की धुंध छोड़ती है, जिससे गौशाला का तापमान कम रहता है और गायों को एसी जैसी ठंडक महसूस होती है। इससे गायों को भीषण गर्मी, डिहाइड्रेशन और तनाव से राहत मिल रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक गर्मी में पशु जल्दी बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे में यह प्रयोग उनके स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है।
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आत्मनिर्भरता के साथ निभा रहीं सामाजिक जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में जिले की कई गौशालाओं का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा गया है। महिलाएं न केवल निराश्रित गोवंश की सेवा कर रही हैं, बल्कि गौशाला के जरिए आय बढ़ाकर अपने परिवार का सहारा भी बन रही हैं। सिहोरा गांव की महिलाओं की इस पहल से प्रभावित होकर अब जिले की अन्य गौशालाओं में भी फोगर सिस्टम और पंखे लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। ग्रामीण आजीविका मिशन और महिलाओं की यह पहल यह साबित करती है कि जब महिलाओं को जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे समाज, पर्यावरण और पशुओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाती हैं।