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Sagar News: बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में हड़ताल का पांचवां दिन, तीन अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित

Fri, 02 Aug 2024 08:23 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर

सार

डॉक्टर्स का कहना है कि हमें काम के बदले जो स्टाइपेंड दिया जाता है। उससे उनकी दैनिक आवश्यकताओं तक की पूर्ति नहीं हो पाती और महीने का खर्चा भी नहीं चल पाता है। उन्होंने सरकार से स्टाइपेंड 30 हजार रुपये किए जाने की मांग की है।
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कैंडल जलाकर प्रदर्शन करते इंटर्न डॉक्टर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्टाईपेड बढ़ाने की मांग को लेकर बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। शुक्रवार को इस हड़ताल के पांच दिन हो जाएंगे डॉक्टर्स ने अपनी हड़ताल के समर्थन में गुरुवार की शाम को कैंडल जलाकर प्रदर्शन किया।

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सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टर्स स्टाइपेंड बढ़ाए जाने की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से बीएमसी परिसर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मांगों के समर्थन में अब तक वह स्थानीय विधायक पूर्व मंत्री कलेक्टर कमिश्नर को ज्ञापन भी दे चुके हैं। ये डॉक्टर सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

इंटर्न डॉक्टरों ने बताया कि वर्ष 2019 बैच के इंटर्न डॉक्टर एक अप्रैल से लगातार बिना किसी छुट्टी के काम कर रहे हैं। 6 घंटे की रेगुलर ड्यूटी करने के साथ-साथ नाइट ड्यूटी में भी करते हैं।
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डॉक्टर्स का कहना है कि इसके उन लोगों ने पहले 4-5 वर्ष मेहनत कर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी है। उसकी फीस 4 से 5 लाख रुपये दी। हमें काम के बदले जो स्टाइपेंड दिया जाता है। उससे उनकी दैनिक आवश्यकताओं तक की पूर्ति नहीं हो पाती और महीने का खर्चा भी नहीं चल पाता है। उन्होंने सरकार से स्टाइपेंड 30 हजार रुपये किए जाने की मांग की है।

डॉक्टर्स ने बताया कि मांग को लेकर मेडिकल कॉलेज के डीन को पत्र दिया था। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांग रखी थी, जिस पर उन्होंने जल्द पूरा कराने का आश्वासन भी दिया था। अब तक कोई निराकरण नहीं हुआ है। इसलिए वह लोग हड़ताल पर जा रहे हैं। हड़ताल के चौथे दिन इन डाक्टरों ने बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के गेट के पास कैंडल जलाई तथा मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।

इस हड़ताल के संबंध में इन इंटर्न डाक्टरों का कहना है कि उनकी मांगों को माने जाने तक यह हड़ताल जारी रहेगी। वहीं इन डॉक्टर्स की हड़ताल से मेडिकल हॉस्पिटल की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है। यह डॉक्टर मेडिकल अस्पताल जिला अस्पताल तथा महिला जिला चिकित्सालय के विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं देते थे।

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