आर्थिक अपराध। (सांकेतिक तस्वीर)
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नगर के निजी बैंक शाखा में धोखाधड़ी के शिकार लोगों की शिकायतें बढ़ती ही जा रही हैं। लोगों का आरोप है कि उन्हें बिना बताए बैंक प्रबंधन ने उनकी मुआवजा राशि को यहां वहां इन्वेस्ट कर दिया है। किसी की एफडी कर दी तो किसी का बीमा कर दिया। धोखाधड़ी का शिकार हुए लोग बैंक के बाहर रुपये वापस करने हंगामा करते नजर आए। द्रौपदी गोंड ने बताया कि उसके खाते से 14 लाख रुपये धोखे से निकाल लिए गए। करीब 22 लोगों की अब तक शिकायतें हो चुकी हैं। खबर है कि नगर के गल्ला व्यापारी और सराफा व्यापारियों की कई लाखों की रकम भी गोलमाल है।
बैंक में जांच उपरांत एसडीएम कुलदीप पाराशर ने बताया कि टाइगर रिजर्व में विस्थापित हुए लोगों के साथ बैंक के कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी की गई। इसी मामले को लेकर आज जांच दल ने जांच शुरू की है। संबंधित बैंक के रिकॉर्ड मंगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के खातों क भी जांच कर करवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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दुर्गावती अभ्यारण्य के विस्थापितों की राशि में हुआ घालमेल
जानकारी के अनुसार विस्थापितों की जानकारी के बिना टारगेट पूरा करने धड़ाधड़ उनकी बीमा पॉलिसी बनाई गई और एफडी भी बनाई गई हैं। अनेक लोगों के बीमा प्रीमियम कई हजारों रुपये है।बताया जा रहा है कि बैंक अधिकारियों ने प्रमोशन पाने के लिए भोलेभाले ग्रामीणों को भरोसे में लिए बिना कई हजार प्रीमियम वाले बीमा कर दिए। वहीं सेल्फ चेक लगाकर ग्रामीणों के खाते से पैसे निकाले गए, जबकि ग्रामीणों का कहना हे कि मुझे पता नहीं कहां-कहां दस्तखत कराए गए। चेक संबंधी कोई जानकारी नहीं है।