कीचड़ में से होकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
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बारिश के मौसम में जहां पक्की सड़कों और विकास के दावे किए जाते हैं, वहीं सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मढ़ी जमुनिया में जमीनी स्थिति कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। यहां चार गांवों के करीब 35 स्कूली बच्चों को रोजाना पढ़ाई के लिए करीब 3 किलोमीटर लंबे दलदली और कच्चे रास्ते से होकर गुजरना पड़ रहा है। रास्ते की हालत इतनी खराब है कि छोटे बच्चों के लिए पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में परिजन उन्हें कंधों और सिर पर बैठाकर रास्ता पार कराने को मजबूर हैं।
दलदल से गुजरकर स्कूल पहुंचते हैं बच्चे
ग्राम पिपरिया बेनी, अमोंदा, बिलगुवा और सालावारा के बच्चे गौरझामर स्थित पीएम श्री स्कूल में पढ़ने जाते हैं। बारिश के दौरान रास्ते में जगह-जगह कीचड़ और दलदल जमा हो जाता है। कई हिस्सों में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक बच्चों को इस रास्ते से बचाने के लिए दूसरा विकल्प करीब 8 किलोमीटर लंबा रास्ता है। लंबी दूरी के कारण अधिकांश बच्चे इसी खराब रास्ते से स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं।
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4 किलोमीटर के रास्ते में सिर्फ 1 किलोमीटर सड़क
ग्रामीणों के अनुसार पंचायत क्षेत्र में कुल करीब 4 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रस्तावित था। इसमें से 1 किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया जा चुका है लेकिन बाकी 3 किलोमीटर हिस्सा अब भी कच्चा और दलदली है। ग्रामीणों का दावा है कि सड़क निर्माण का प्रस्ताव पंचायत से पारित होकर करीब 10 महीने से पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के कार्यालय में लंबित है। स्थानीय विधायक बृज बिहारी पटेरिया से भी सड़क निर्माण की मांग की गई लेकिन उन्होंने बजट की कमी का हवाला दे दिया। ग्रामीणों ने सांसद राहुल सिंह लोधी और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के सामने भी समस्या रखी लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं।
कलेक्टर से लगाई सड़क निर्माण की गुहार
लगातार परेशानी के बाद ग्रामीण मंगलवार को सागर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर 3 किलोमीटर सड़क का जल्द निर्माण कराने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आने-जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बारिश के दिनों में बच्चों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन जाती है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए सड़क निर्माण की दिशा में जल्द कदम उठाएगा।