बुंदेलखंड के बंडा विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला अब सियासत और प्रशासनिक दावों के बीच उलझकर रह गया है। एक ओर जहां प्रशासन मौतों का आंकड़ा 13 बताकर स्थिति सामान्य होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स, ग्रामीणों और विपक्षी दलों के दावे इन आंकड़ों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इस त्रासदी में असली सच क्या है, इसे लेकर पूरे क्षेत्र में असमंजस और आक्रोश का माहौल है।
प्रशासनिक दावे और मंत्रियों के दौरे
सागर दौरे पर आ रहे प्रदेश सरकार के मंत्रियों और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों का आधिकारिक रुख अब भी मौतों के आंकड़े 13 पर अटका हुआ है। प्रशासन का तर्क है कि आधिकारिक रूप से अस्पतालों के रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही मौतों की पुष्टि की जा रही है। इसके अलावा, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) और अन्य स्थानीय अस्पतालों में लगभग 96 से अधिक गंभीर मरीज उपचाराधीन हैं, जिनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
स्थानीय मीडिया और विपक्ष के गंभीर आरोप
इसके विपरीत, धरातल पर स्थिति बेहद डरावनी है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अलग-अलग दावों के अनुसार, इस त्रासदी में मरने वालों का आंकड़ा 24 से 27 तक पहुंच चुका है। वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रभावित गांवों का दौरा करने के बाद सनसनीखेज दावा किया है कि सरकार सच छिपा रही है और जहरीली शराब से 50 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। पटवारी के अनुसार, कई परिवारों ने डर और प्रशासनिक दबाव के चलते शवों का चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया, जिससे ये मौतें सरकारी फाइलों में दर्ज नहीं हो पाईं।
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प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के इस भारी अंतर ने पीड़ित परिवारों के दर्द को और बढ़ा दिया है। जनता अब लाचारी के बीच बस यह जानना चाहती है कि आखिर इस त्रासदी में असल सच क्या है और मौतों के इन आंकड़ों के अंतर के पीछे जिम्मेदार कौन है।