सागर के आदिवासी विकास खंड केसली में करीब पांच महीने पहले धान खरीदी केंद्र पर अमानक धान खरीदी का मामला सामने आया था। दिगंबर स्व सहायता समूह बम्होरी केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर और समिति स्तर पर नियुक्त किए गए सर्वेयर द्वारा अमानक स्तर की धान की खरीदी की गई थी। अमानक स्तर की धान खरीदी के मामले में शिकायत के बाद कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पलक खरे ने कार्रवाई की थी।
कार्रवाई में एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया था कि अवैधानिक रूप से लाभ कमाने और शासन के साथ धोखाधड़ी की मंशा से अमानक स्तर की धान बोरियों में भरी गई है। इसके खिलाफ आरोपियों पर प्रकरण पंजीबद्ध कर तलाश की जा रही थी।
आरोपी करीब पांच महीने से फरार थे...
धान खरीद कर घोटाला करने वाले आरोपी पिछले पांच महीने से फरार थे। पुलिस ने फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किया था। आरोपियों की तलाश के लिए सागर पुलिस अधीक्षक ने एडिशनल एसपी बीना और एसडीओपी देवरी के निर्देशन में एक संयुक्त टीम गठित की थी। टीम ने आरोपियों की लगातार तलाश की, मामले के मुख्य आरोपी अतिशय पिता अवधेश जैन निवासी देवरी, सर्वेयर प्रशांत सेन निवासी देवरी, कंप्यूटर ऑपरेटर अनुपम दुबे निवासी सहजपुर केसली को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने पूछताछ के बाद न्यायालय में पेश किया, यहां से सभी को जेल भेज दिया गया।
स्थानीय युवक ने सोशल मीडिया पर किया था घोटाले का खुलासा...
केसली मंडी परिसर में बने दिगंबर स्व सहायता समूह के खरीद केंद्र में किसानों से धान खरीदी की जा रही थी। सात जनवरी को केसली मंडी प्रांगण में चल रहे दिगंबर स्व सहायता समूह के खरीदी केंद्र पर धान की करीब 38 हजार बोरियों में सिर्फ भूसा भरा मिला। एक स्थानीय युवक द्वारा सोशल मीडिया पर इसका खुलासे करने के बाद हड़कंप मच गया था।
मौके पर तहसीलदार और खाद्य विभाग के अधिकारी पहुंचे थे। खरीद केंद्र को सील कर जांच शुरू की थी। इस बीच खरीद केंद्र संचालक सहित कर्मचारी मौके से भाग निकले। पूरे मंडी परिसर में रखी लगभग 38 हजार बोरियों में धान की जगह भूसा भरा मिला था। किसान से खरीदी गई धान बताकर भुगतान लेने की तैयारी थी।