अपने चपरासी की आत्महत्या के मामले में बर्खास्त किया गया एक जज सोमवार को उस समय जिला एवं सत्र अदालत से भाग खड़ा हुआ जब उसे वहां सजा सुनाई जाने वाली थी। उसे इस बात का डर था कि अदालत उसके खिलाफ फैसला देकर जेल भेज देगी।
मिली जानकारी के अनुसार नितिन कुमरे पहले जबलपुर में न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात था। उस समय उसके 50 हजार रुपए चोरी हो गए जिसका शक उसने अपने चपरासी मोहम्मद नियाज पर करते हुए उसको बुरी तरह प्रताड़ित किया। इससे दुखी होकर नियाज ने 27 फरवरी, 2010 को आत्महत्या कर ली।
आत्महत्या से पहले लिखे गए नियाज के पत्र के आधार पर कुमरे के खिलाफ हनुमानताल थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। बाद में एक जांच के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने उसे बर्खास्त कर दिया। लंबे समय तक पेशी पर न आने के कारण जिला एवं सत्र न्यायाधीश पी. माहेश्वरी ने उसके खिलाफ छह दिसंबर को वारंट जारी कर पुलिस को निर्देश दिया कि वह कुमरे को गिरफ्तार कर 24 जनवरी तक अदालत में पेश करे।
इस पर वह सोमवार को कोर्ट के सामने पेश हुआ और वारंट कैंसिल कराने की कोशिश की पर जब उसे लगा कि कोई राहत नहीं मिल पाएगी तो वह कोर्ट से फरार हो गया।