फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

RSS का स्वर साधक संगम:  ग्वालियर में संघ के घोष की ऐतिहासिक यात्रा पर लगेगी प्रदर्शनी, भागवत भी आएंगे 

Tue, 23 Nov 2021 02:30 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर

सार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में संघ का स्वर साधक संगम होगा। इसका उद्घाटन 25 नवंबर को होगा और 26 नवंबर को शहर में पथ संचलन निकाला जाएगा। 
विज्ञापन
संघ का घोष। (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत का चार दिवसीय प्रांतीय स्वर साधक संगम (घोष शिविर) का आयोजन 25 नवंबर से सरस्वती शिशु मंदिर केदारधाम परिसर शिवपुरी लिंक रोड, ग्वालियर पर किया जाएगा। इसमें आकर्षण का केन्द्र यहां लगने वाली ऐतिहासिक घोष प्रदर्शनी रहेगी। प्रदर्शनी का शुभारंभ 25 नवंबर को सुबह 10.30 बजे मध्य भारत प्रांत के संघचालक अशोक पांडे करेंगे। 
विज्ञापन


ग्वालियर विभाग संघचालक विजय गुप्ता ने बताया कि इस प्रदर्शनी में चार श्रेणियां होंगी। पारंपरिक एवं प्राचीन वाद्य यंत्रों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन होगा। ऐतिहासिक प्रदर्शनी में घोष की इतिहास यात्रा को एलईडी के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रदर्शनी में भारतीय संगीत के इतिहास में वादकों एवं गायकों के योगदान तथा उनके जीवन परिचय तथा पारंपरिक व दुर्लभ वाद्य यंत्रों का 40 स्लाइड्स में चित्रमय प्रदर्शन होगा। यह प्रदर्शनी 25 से 28 नवंबर तक चलेगी। प्रदर्शनी के दौरान वाद्य संयंत्रों के के इतिहास की जानकारी देने के लिए स्वयंसेवकों व विशेषज्ञों की टोली पूरे समय मौजूद रहेगी। 

26 को आएंगे संघ प्रमुख 
25 से 28 नवंबर तक चलने वाले मध्यभारत प्रांत के इस स्वर साधक संगम का उदघाटन  25 नवंबर को होगा। इस घोष शिविर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी भाग लेंगे। डॉ. भागवत 26 नवंबर को ग्वालियर आएंगे। 28 नवंबर तक शिविर में रहेंगे। 26 नवंबर को 31 जिलों से आए 550 घोष वादक पथ संचलन निकालेंगे। यह संचलन फूलबाग स्थित वीरांगना लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ जीवाईएमसी मैदान पर समाप्त होगा।
विज्ञापन


200 साल पुरानी है रूद्र वीणा
संघ सूत्रों के मुताबिक प्रदर्शनी में प्रस्तुत होने वाली रूद्र वीणा 200 साल पुरानी है। इसी तरह दिलरूबा, तबला और डग्गा, सरोद व पैडल हारमोनियम 100-100 साल पुराने हैं। इसी तरह जिटार (80 वर्ष), पखावज (80 वर्ष), शहनाई (60 वर्ष) के इतिहास को भी प्रदर्शनी में प्रस्तुत किया जाएगा।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें