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MP: विंध्य पर्वत श्रृंखला में लगी भीषण आग, वन्यजीव व पर्यावरण पर गंभीर खतरा; एक सप्ताह बाद भी नहीं हुई काबू

Sat, 25 Apr 2026 10:36 AM IST
रीवा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा

सार

मध्य प्रदेश के रीवा के गोविंदगढ़ क्षेत्र में छुहिया घाटी और विंध्य पर्वत श्रृंखला में लगी भीषण आग ने विकराल रूप ले लिया है, जिससे जंगल, वन्यजीव और पर्यावरण पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
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छुहिया घाटी से विंध्य पर्वत तक फैली आग, एक हफ्ते से जल रहा जंगल। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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रीवा के गोविंदगढ़ क्षेत्र अंतर्गत छुहिया घाटी और विंध्य पर्वत श्रृंखला में भीषण आग ने विकराल रूप ले लिया है। पिछले एक सप्ताह से लगी यह आग अब तेजी से पूरे जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में फैल चुकी है, जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
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'जीव-जंतु और वन संपदा तेजी से नष्ट हो रही'
स्थानीय समाजसेवी पीयूष त्रिपाठी एवं राहुल शर्मा के साथ नगर परिषद गोविंदगढ़ की फायर ब्रिगेड टीम लगातार आग बुझाने में जुटी हुई है। कड़ी मशक्कत के बाद शिकारघा की पहाड़ी के पास का एक छोटा हिस्सा ही फिलहाल सुरक्षित किया जा सका है, जबकि बाकी क्षेत्र में आग लगातार फैल रही है। आग की भयावहता को देखते हुए स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। जंगलों में रहने वाले जीव-जंतु और वन संपदा तेजी से नष्ट हो रही है। धुएं के कारण आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।

जल्द बुझाई जाए जंगल में लगी आग- अरविंद्र मिश्रा
पर्यावरण के मुद्दों पर दो दशकों से सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद्र मिश्रा ने जंगलों में लगी आग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग की यह कोई पहली घटना नहीं है, यह प्रशासनिक लापरवाही का भी एक जीवंत उदाहरण है। सामुदायिक भागीदारी से वनों में आग की ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है। जल्द से जल्द प्रशासन को आग बुझाना चाहिए।
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स्मोकिंग से लगी आग
मिली जानकारी के अनुसार, छुहिया घाटी वाले मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक रहता है। यहां वाहनों की लगातार आवाजाही बनी रहती है। किसी अज्ञात राहगीर ने बीड़ी सिगरेट पीकर जंगल में ही सड़क किनारे फेंक दी है, जिससे धीरे-धीरे करके आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। ऐसा लोगों के द्वारा बताया जा रहा है।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शासन-प्रशासन, वन विभाग और दमकल विभाग को संयुक्त रूप से युद्ध स्तर पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी विकट परिस्थिति में ड्रोन के माध्यम से पानी या फायर रिटार्डेंट का छिड़काव, हेलीकॉप्टर सहायता और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि आग पर जल्द से जल्द काबू पाया जा सके।
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