माता-पिता के साथ टॉपर बिटिया आयुषी।
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12वीं में ही देख लिया था देश सेवा का सपना
आयुषी बताती हैं कि 12वीं कक्षा के दौरान ही यह ठान लिया था कि सेना में जाकर देश की सेवा करनी है। इसी लक्ष्य को सामने रखकर उन्होंने कठिन परिश्रम की राह चुनी और सफलता हासिल की।उन्हें सबसे ज्यादा प्रेरणा रीवा की अवनी चतुर्वेदी से मिली, जो भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं। “जब स्कूल में थी, तब रीवा की अवनी चतुर्वेदी का एयरफोर्स में चयन हुआ था। शहर में उनके पोस्टर लगे थे। तभी सोचा था कि आर्मी की यूनिफॉर्म मुझे भी शोभा देगी।”
पढ़ाई में बड़े भाई का मिला पूरा साथ
पढ़ाई के दौरान आयुषी को परिवार का पूरा सहयोग मिला। उनके बड़े भाई भी एसएसबी कैंडिडेट रहे, लेकिन मेडिकल कारणों से चयनित नहीं हो पाए। बावजूद इसके उन्होंने आयुषी को हर कदम पर मार्गदर्शन और हौसला दिया। आयुषी खुद मानती हैं कि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो किसी भी मंजिल तक पहुंचना संभव है।
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परिवार का सहयोग
आयुषी की सफलता में उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा। पिता रमेश वर्मा ने कहा, “आयुषी बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही है। खेलों में भी हमेशा आगे रही। उसने लक्ष्य तय किया और मेहनत से CDS पास कर दिखाया।” उनकी मां ममता वर्मा ने भावुक होकर कहा, “बेटा हर्ष वर्मा भी सेना में जाना चाहता था। उसने CDS पास किया लेकिन मेडिकल कारणों से शामिल नहीं हो पाया। आज आयुषी ने यह सपना पूरा कर दिया।”
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पूरे विंध्य क्षेत्र में खुशी का माहौल
आयुषी की इस उपलब्धि ने रीवा सहित पूरे विंध्य क्षेत्र में खुशी का माहौल बना दिया है। लोग सोशल मीडिया पर उनकी सफलता की जमकर सराहना कर रहे हैं और उन्हें बधाई संदेश भेज रहे हैं। परिवार और शिक्षकों का कहना है कि आयुषी ने साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, बस उन्हें अवसर और प्रोत्साहन देने की जरूरत है।
युवाओं के लिए बनीं प्रेरणा
भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर आयुषी ने न केवल अपने सपने पूरे किए, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि समर्पण, अनुशासन और कड़ी मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।