रीवा शहर के गुरु कृपा नर्सिंग होम में करीब 40 वर्षों से सेवाएं दे रहे शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद जैन की दवाई लिखने की शैली इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। बुधवार सुबह से एक कथित प्रिस्क्रिप्शन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और यूट्यूब पर वायरल हो रहा है। पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि पर्चे पर लिखी दवाइयों को पढ़ना किसी पहेली को हल करने से कम नहीं है।
बताया यह भी जाता है कि गुरु कृपा नर्सिंग होम का संचालन डॉ. प्रमोद जैन और उनकी पत्नी मधु जैन द्वारा किया जाता है। डॉ. प्रमोद जैन यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चों के मरीज देखते हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी ओपीडी में रोजाना करीब 150 से 200 मरीज आने की बात कही जा रही है। उनकी फीस 100 रुपये बताई गई है। इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक प्रिस्क्रिप्शन को लेकर यूजर्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। पोस्ट में दावा किया गया है कि लिखावट इतनी अस्पष्ट है कि दवा के नाम पहचानना मुश्किल नजर आ रहा है। इसी अंदाज में इसे हास्यास्पद तरीके से शेयर किया गया, जिसके बाद पोस्ट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
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जहां फेसबुक पर सविनय मिश्रा नाम के यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि जो भी व्यक्ति इस पर्चे को पढ़ पाएगा, उसे 2000 रुपये का इनाम दिया जाएगा। हालांकि वायरल पर्चे की वास्तविकता, उस पर लिखी दवाओं और मरीज की पहचान से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इस मामले को लेकर जब डॉ. प्रमोद जैन से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी लिखी दवा से किसी बच्चे को नुकसान पहुंचता है तो उनके खिलाफ शिकायत की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि वे मरीजों से केवल 100 रुपये फीस लेते हैं और सामान्यतः 100 से 150 रुपये के भीतर की दवाइयां लिखने का प्रयास करते हैं, ताकि गरीब और आम वर्ग के मरीजों को राहत मिल सके।
वहीं अब सोशल मीडिया पर वायरल इस पर्चे को लेकर लोग जहां लिखावट पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं डॉक्टर की लंबे समय से चली आ रही सेवाओं और कम फीस को लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।