कांग्रेस ने 24 साल बाद रीवा नगर निगम के महापौर पद पर जीत हासिल की है। पार्टी के उम्मीदवार अजय मिश्रा बाबा ने भाजपा के प्रबोध व्यास को दस हजार से अधिक वोटों से हराया और बड़ी जीत हासिल की। विंध्य क्षेत्र में भाजपा को यह सबसे तगड़ा झटका लगा है।
अजय मिश्रा ने पहले राउंड में बढ़त हासिल की और अंत तक बढ़त कायम रखी। आखिर में वे 10 हजार 282 वोट से जीते। पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक राजेंद्र शुक्ला के वार्ड में भी उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। पार्षदों की बात करें तो भाजपा के 18 और कांग्रेस के 17 पार्षद जीतकर आए। 45 वार्डों वाली परिषद में 10 निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव जीते हैं।
कौन है अजय मिश्रा
अजय मिश्रा लगातार तीन बार पार्षद रहे है। पहली बार 1999 में वार्ड क्रमांक 17 से, दूसरी बार 2009 में वार्ड क्रमांक 19 और तीसरी बार वर्ष 2014 में वार्ड क्रमांक 17 से पार्षद चुने गए थे। 2014 में तो अजय मिश्रा ने नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई थी। श्रीनिवास तिवारी और सुंदरलाल तिवारी के करीबी माने जाने वाले अजय मिश्रा की छवि जमीनी नेता की थी, जिसका उन्हें फायदा मिला।
रीवा में महापौर पद का इतिहास
रीवा में 1995 में पहली बार नगर निगम के चुनाव हुए। तब पार्षदों ने कांग्रेस के अमीरुल्ला खान को पहला महापौर चुना। वे 1997 तक इस कुर्सी पर रहे। इसके बाद कांग्रेस की सावित्री पांडेय कुछ समय के लिए और फिर कमलजीत सिंह डंग शासन से मनोनीत महापौर रहे। 1998 में भाजपा के राजेंद्र ताम्रकार को पहली बार जनता ने सीधे महापौर चुना। उनके बाद 1999 में आशा सिंह, 2005 में वीरेंद्र गुप्ता, 2010 में शिवेंद्र सिंह पटेल और 2015 में ममता गुप्ता ने महापौर का चुनाव जीता। यानी 1998 से जनता महापौर चुन रही है और हर बार भाजपा का ही महापौर बना है।