दाहिने से दूसरे नंबर कमांडो अरुण गौतम सहित अन्य लोग
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रीवा सेंट्रल जेल से बाहर आने के बाद सेना से रिटॉयर्ड जवान, समाजसेवी व कमांडो अरुण गौतम ने जेल अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रेस व्रार्ता कर बताया कि जेल की चारदीवारी में बंदियों को दी जाने वाली तरह-तरह की यातनाएं गूंजती हैं।
कमांडो गौतम ने बताया कि मुझे जनता की आवाज को उठाने के बदले इतनी बड़ी सजा मिली है कि सरकार और पुलिस प्रसाशन ने मेरे खिलाफ मुकदमा दर्जकर सलाखों के पीछे डाल दिया। जेल में जाने के बाद मुझे कुछ फर्जी मुकदमें दिखाकर NSA की कार्रवाई की गई। इसके बाद जेल के अंदर का तांडव देखने को मिला। कमांडो अरुण गौतम की माने तो जब कोई बंदी जेल में आता है तो उसका स्वागत पट्टों से किया जाता है। यहां तक कि बीपी माप-मापकर मारपीट जेल के अधिकारी सजा काट रहे कैदियों से कराते हैं। एडवांस रकम के साथ माहवारी बांधते हैं, जो पैसे नहीं देते उनके साथ आदमखोर की तरह व्यवहार करते हैं। खाने के साथ-साथ रहने सोने के भी चार्ज लिए जाते हैं।
'जेल में पट्टे से पिटाई'
रीवा सेंट्रल जेल की पोल खोलते हुए कमांडो अरुण गौतम ने बताया, जेल के अंदर बंदियों को तरह-तरह की यातनाएं दी जाती हैं। आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों से जानवर की तरह मारपीट की जाती है। कैदियों की पिटाई पट्टे से की जाती है। उस दौरान कई कैदी बेहोश भी हो जाते हैं। ऐसे में बीपी मापकर फिर मारपीट शुरू कर दी जाती है।
इतना ही नहीं जेल में खाने-पीने की सामग्री में महाघोटाला होता है। कैदियों को दूध, अंडे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ नहीं दिया जाता है। 716 बेड के बैरक में भूसों की तरह एक बेड में चार लोगों को सुलाया जाता है। जेल के अंदर कैदियों को तंबाकू, सिगरेट और गांजा उपलब्ध रहता है, जो सब केंद्रीय जेल अधीक्षक के सह पर चल रहा है।