पुलिस के अनुसार रिटायर्ड प्रोफेसर से ठगी करने के मामले में फरार आरोपियों की तलाश में एसपी अमित कुमार के निर्देशन व एएसपी (शहर) राकेश खाखा के मार्गदर्शन में पुलिस टीमों ने अलग-अलग जगह दबिश देकर आरोपी 27 वर्षीय मोहन काबरा पिता रुघनाथ काबरा निवासी 20-ई शिव अपार्टमेंट, एनके रोड, बादल कॉलोनी, जिला मोहाली (पंजाब), 30 वर्षीय सुमीरन शर्मा पिता स्वामी प्रसाद शर्मा निवासी वार्ड नं. 07 आर्य समाज मोहल्ला, अखनूर, जिला जम्मू (जम्मू-कश्मीर) और 37 वर्षीय सुरेश रजक पिता गणेश रजक निवासी धुलिया जान सोनापुर जिला डिब्रूगढ़ (असम) को भी गिरफ्तार कर लिया है।
मामले में तीन सप्ताह पहले आरोपी अशोक जायसवाल पिता राधेश्याम जायसवाल, सनी जयसवाल पिता सोनू जायसवाल, सारांश तिवारी उर्फ शानू पिता योगेंद्र तिवारी व एक नाबालिग लड़के तथा नीमच जिले से पवन कुमावत पिता कैलाश कुमावत निवासी इंद्रा कॉलोनी नयागांव थाना जावद जिला नीमच, उत्तरप्रदेश के गोरखपुर से एनजीओ संचालक अमरेंद्र कुमार मौर्य पिता बड़ेलाल प्रसाद मौर्य निवासी गोरखपुर तथा गुजरात के जामनगर से आरोपी आरिफ घाटा, हमीद खान पठान, शाहिद कुरैशी और सादिक हसन समा निवासी जामनगर व राजेश कुमार निवासी ग्राम अंबारी थाना रघुनाथपुर जिला सिवान (बिहार) को गिरफ्तार किया गया था।
किस आरोपी की क्या भूमिका
पुलिस के अनुसार आरोपी मोहन ने पूर्व में गिरफ्तार आरोपी अमरेंद्र के साथ मिलकर उसके नाम से बैंक खाते खुलवाए थे और उनका उपयोग ठगी की राशि के ट्रांजेक्शन में किया था। आरोपी अमरेंद्र कमीशन पर खाता मोहन को देने के लिए सुरेश के साथ गुवाहाटी गया था। मोहन ने अमरेंद्र को कमीशन का लालच देकर उसके खाते का उपयोग फ्रॉड में किया। मोहन द्वारा अमरेंद्र और अन्य खातों के माध्यम से लगभग दो करोड़ रुपये के फ्रॉड ट्रांजेक्शन कराए गए। महिला आरोपी सुमीरन ने पूर्व गिरफ्तार आरोपी शानू के साथ मिलकर ठगी की राशि को अपने खाते से आगे ट्रांसफर किया था। सुमीरन टेलीग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से apk फाइल भेज कर अकाउंट का एक्सेस लेकर फ्रॉड करती थी। इन तीनों आरोपियों की भूमिका से यह स्पष्ट हुआ कि यह एक संगठित, अंतरराज्यीय एवं तकनीकी रूप से संचालित साइबर गिरोह है। मामले में कुछ और आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश में टीमें भेजी गई है।
ये भी पढ़ें-
पुलिस लाइन में पहरा ड्यूटी के दौरान आरक्षक ने खुद को मारी गोली, मौके पर मौत
इस प्रकार की थी ठगी
अज्ञात व्यक्ति (साइबर ठग) ने 15 नवंबर 2025 को रिटायर्ड प्रोफोसर को 15 नवंबर 2025 को रिटायर्ड प्रोफेसर को फोन कॉल कर स्वयं को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए कहा था आपके नाम जारी मोबाइल फोन सिम का उपयोग एक बड़े फ्राड में हुआ है तथा मुंबई स्थित केनरा बैंक में करीब 247 रुपए की मनी लांड्रिंग की गई है। उन्हें गंभीर अपराध में गिरफ्तार करने का डर दिखाकर उनसे उनके बैंक खातों, आधार कार्ड आदि की जानकारी ली गई तथा वाट्सएप पर आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज मंगवाए गए। इस दौरान जब आरोपियों को पता चला कि रिटायर्ड प्रोफेसर का बेटा कनाडा में है तो उसे गिरफ्तार करने तथा भारत नहीं आने का डर दिखाकर रुपयों की मांग की गई थी। इस प्रकार उन्हें 15 नवंबर से 12 दिसंबर 2025 तक डिजीटल अरेस्ट कर रखा गया तथा 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए की ठगी की गई थी।
कनाडा से बेटे के आने के बाद की थी शिकायत
रिटायर्ड प्रोफेसर की आए दिन कनाडा में बेटे से बात होती थी तथा वे घर से बाहर आते-जाते भी रहे लेकिन डर के कारण उन्होंने मामले की जानकारी अपने बेटे व परिवार के अन्य सदस्यों को भी नहीं दी थी। उनके मोबाइल फोन में सिंगल एप इंस्टॉल कराया गया तथा वीडियो कॉल के दौरान न्यायालय जैसा सेटअप, जज, वकील व गवाहों का नाटकीय दृश्य दिखाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा गया और उनकी संपत्ति व बैंक खातों की जानकारी लेकर ब्लैकमेल करते हुए उन्हें ठगा गय था। एक दिन जब बेटा कानाडा से अपने घर रतलाम आया था तब पिता ने उसे घटना की पूरी जानकारी दी थी। इसके बाद बेटे ने उन्हें साथ ले जाकर पुलिस में शिकायत की थी।