भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने रतलाम दौरे के बीच बड़ी बातें कही हैं। खंडेलवाल ने कहा कि जीरामजी बिल ग्रामीण विकास के लिए अहम कदम है। उन्होंने बताया कि इस योजना से न केवल प्रदेश बल्कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।
खंडेलवाल ने बताया कि मनरेगा में पहले 100 दिन मजदूरी मिलती थी, जबकि नई जीरामजी योजना के तहत 125 दिन मजदूरी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं ग्रामीण क्षेत्र से आता हूँ। मनरेगा के दौरान फसलों की कटाई और बोवनी के समय मजदूरों को काम में परेशानी होती थी। नई योजना में ऐसे दिन तय किए जाएंगे जब बोवनी या कटाई का काम नहीं होगा, जिससे मजदूरों को डबल काम मिलने का अवसर मिलेगा।”
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मजदूरों को 24 दिन का काम मिलने, भ्रष्टाचार के आरोप और राज्य सरकारों पर अतिरिक्त बोझ के सवाल पर उन्होंने कहा कि 42 दिन का काम मिलने का कारण यह था कि फसल की कटाई और बोवनी के समय मजदूर दूसरी जगह चले जाते थे। अब राज्य और केंद्र सरकार अपने-अपने बजट से राशि देंगे। इससे ग्राम पंचायतों के अनुसार गांवों में काम होंगे और मजदूरों को 125 दिन की मजदूरी मिलेगी। भुगतान डिजीटल माध्यम से सीधे खातों में होगा।
जिनसे सवाल किया गया कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद जिम्मेदार अधिकारी नहीं सुनते, खंडेलवाल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार ने दोषियों पर कार्रवाई की है और सभी को घटना से सबक लेना चाहिए।
नगरीय निकायों और निगम मंडलों में नियुक्तियों पर सवाल के जवाब में खंडेलवाल ने कहा कि नियुक्तियां राजनीतिक दृष्टिकोण से की जाती हैं। जहां कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देनी होती है, वहां सरकार और संगठन मिलकर फैसला लेते हैं। निगम मंडलों और एल्डरमैन की नियुक्तियां जल्द पूरी की जाएंगी।
खंडेलवाल ने कहा कि संगठन और सत्ता समानांतर चलने के बावजूद अच्छी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं। जहां संगठन में कमी होती है, वहां सरकार के पदाधिकारी सूचित करते हैं और सरकार में भी संगठन के पदाधिकारी बताते हैं।