मां कंवलका माता का पांडव कालीन अति प्राचीन मंदिर
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मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में मैदानी इलाके में बनी पहाड़ी पर मां कंवलका माता का पांडव कालीन अति प्राचीन मंदिर स्थित है। मान्यता है कि यहां माताजी दिन में तीन बार रूप बदलती हैं। चैत्र नवरात्रि में ग्राम पंचायत द्वारा यहां मेले का आयोजन भी किया जाता है। नवरात्रि में माताजी के दर्शन के लिए दूर-दूर से भक्त पहुंचते हैं।
मध्य प्रदेश के रतलाम जिला मुख्यालय से 32 किलोमीटर रतलाम लेबड फोरलेन स्थित सतरुंडा चौराहा से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर बिरमावल ग्राम पंचायत क्षेत्र के मैदानी इलाके में बनी पहाड़ी पर कंवलका माताजी का पांडव कालीनअति प्राचीन मंदिर स्थित है। इस मंदिर में चार मूर्तियां विराजमान हैं, जिनमें कवलका माताजी की प्रतिमा के साथ कालकामाता, कालभैरव और भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में आदिकाल से विराजित हैं।
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माताजी के दर्शन के लिए पहाड़ी पर बनी 300 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है। नवरात्रि में यहां दूर-दूर से भक्त माताजी के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर पुजारी द्वारा माताजी को मदिरा भोग लगाया जाता है। ग्राम पंचायत द्वारा यहां मेले का आयोजन भी किया जाता है।
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अज्ञातवास के दौरान आए थे पांडव
पौराणिक मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडु पुत्र भीम यहां आए थे। उस दौरान उनकी गाय यहां से विचरण करते हुए कहीं दूर चली गई थी। उसको ढूंढने के लिए भीम ने अपनी विशाल मुट्ठी से मिट्टी जमा कर इस पहाड़ी का निर्माण किया था। इस पहाड़ी पर चढ़कर अपनी गाय को खोजा था। कहा जाता है कि इसके बाद पांडवों द्वारा कंवलका माता मंदिर को अन्य जगह से उठाकर लाया गया और यहां पर माता की स्थापना की गई। मातारानी का यह मंदिर बिना नींव के पहाड़ी पर बना हुआ है। बताया जाता है कि न ही इस मंदिर की नींव है और न ही मंदिर निर्माण में उपयोग ली गई शिलाओं को जोड़ने के लिए किसी पदार्थ का उपयोग किया गया है।
उल्टा स्वस्तिक बनाने से होती हैं मन्नत पूरी
माता मंदिर में संतान प्राप्ति के लिए आने वाले भक्त मंदिर की दीवार पर उल्टा स्वस्तिक बनाते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त पुनः आकर सीधा स्वस्तिक बनाते हैं और माताजी को भोग लगाकर चढ़ावा चढ़ाते हैं।
माताजी तीन रूप में देती हैं दर्शन
मंदिर में विराजित माता जी की प्रतिमा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। माताजी सुबह बाल्यावस्था में दोपहर में युवास्था में और रात्रि में प्रौढ़ावस्था में दर्शन देती हैं।