रतलाम जिले के जावरा में पुलिस कॉलोनी के पास स्थित आइस फैक्ट्री में मंगलवार रात अमोनिया गैस लीकेज होने से हड़कंप मच गया। गैस लीकेज से पुलिस कॉलोनी में निवासरत सीएसपी दुर्गेश आर्मो और उनका परिवार गैस की चपेट में आ गया, जिससे उन्हें आंखों में जलन होने लगी।
जानकारी मिलने पर पुलिस प्रशासन का अमला हरकत के आया और मौके पर फायर ब्रिगेड को बुलवाकर पानी का छिड़काव करवाया। उसके बाद गैस लीकेज वाल बंद किया गया। बुधवार सुबह मध्यप्रदेश प्रदूषण बोर्ड उज्जैन की फैक्ट्री की जांच करने पहुंची। जांच में पाया कि फैक्ट्री अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। फैक्ट्री संचालक के पास किसी तरह की परमिशन नहीं पाई गई।
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रतलाम के जावरा में पुलिस लाइन के निकट स्थित आइस फैक्ट्री में बीती रात अमोनिया गैस लीकेज हो गई। गैस जैसे-जैसे फैलती गई तो आसपास के क्षेत्र सहित पुलिस कॉलोनी के रहवासी भी इसकी चपेट में आ गए, जिसमें जावरा सीएसपी दुर्गेश आर्मो और उनका परिवार भी शामिल है। जावरा सीएसपी दुर्गेश आर्मो जब रात को टहल रहे थे। तभी उनकी आंखों में आंसू आने लगे और जलन होने लगी, जिसके बाद उन्हें जानकारी मिली कि आइस फैक्ट्री से अमोनिया गैस का रिसाव हो रहा है। गैस रिसाव के कारण सीएसपी के माता-पिता और भाई भी इसकी चपेट में आ गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। सीएसपी दुर्गेश आर्मो ने गैस रिसाव की सूचना तत्काल पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारियों को दी, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र व पुलिस कॉलोनी को खाली करवाया गया व उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने की सूचना दी गई।
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गैस लीकेज के समय एसपी अमित कुमार जावरा में दौरे पर थे। जानकारी मिलते ही वह भी मौके पर पहुंचे। सूचना मिलते ही जावरा एसडीएम त्रिलोचन गौड़, एसडीओपी संदीप मालवीय, थाना प्रभारी जितेंद्र जादौन मौके भी मौके पर पहुंचे और फायर ब्रिगेड बुलाई गई। फैक्ट्री में स्थित टैंक पर पानी का छिड़काव किया गया। बताया जा रहा है कि टैंक के वॉल में लीकेज होने के कारण गैस का रिसाव हो रहा था, जिसे बंद किया गया व फैक्ट्री सहित प्रभावित क्षेत्र में पानी का छिड़काव करवाया गया। सीएसपी दुर्गेश आर्मो की सजगता से बड़ी घटना होने से बच गई।
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घटना की जांच करने के लिए बुधवार सुबह मध्यप्रदेश प्रदूषण बोर्ड उज्जैन की टीम आइस फैक्ट्री पर पहुंची है। टीम के अधिकारियों ने संचालक से फैक्ट्री से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन संचालक कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाया। फैक्ट्री संचालक के पास न तो फैक्ट्री संचालित करने की परमिशन पाई गई और न ही मध्यप्रदेश पॉल्यूशन बोर्ड का लाइसेंस पाया गया। टीम के सदस्यों ने मौके पर पंचनामा बनाया। फिलहाल, फैक्ट्री को बंद कर दिया गया है।