ग्रेटर कौकल ज्यादा उड़ नहीं पाते हैं। अक्सर पेड़ों में चढ़ते या जमीन पर चलते हुए देखे जाते हैं, क्योंकि वे कीड़े, अंडे और अन्य पक्षियों के चूजों को अपना आहार बनाते हैं। ये कोयल की कूक की तरह गहरी आवाज निकालते हैं।
मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में दुर्लभ ग्रेटर कौकल या कौवा तीकर पक्षी नजर आया है। शहडोल संभाग कमिश्नर राजीव शर्मा ने टाइगर रिजर्व के भ्रमण के दौरान खुद उसकी तस्वीर अपने मोबाइल कैमरे में कैद की। शर्मा का कहना है कि यह कोई मामूली पक्षी नहीं है, यह भारतीय उपमहाद्वीप के पक्षी परिवार का सदस्य है।
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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के संयुक्त संचालक लवित भारती ने बताया कि ग्रेटर कौकल या कौवा तीतर (सेंट्रोपस साइनेंसिस), पक्षियों में कोयल वर्णक्रम का एक बड़ा गैर-परजीवी सदस्य है। अंग्रेजी में इसे कुकुलीफोर्मेस कहते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में यह पाया जाता है। ये लंबी पूंछ और तांबे के भूरे पंखों वाला होता है तथा कौवे की तरह दिखता है। यह जंगल से लेकर खेतों और शहरी उद्यानों में भी पाया जाता है।
कोयल की कूक की तरह होती है आवाज
ग्रेटर कौकल ज्यादा उड़ नहीं पाते हैं। अक्सर पेड़ों में चढ़ते या जमीन पर चलते हुए देखे जाते हैं, क्योंकि वे कीड़े, अंडे और अन्य पक्षियों के चूजों को अपना आहार बनाते हैं। ये कोयल की कूक की तरह गहरी आवाज निकालते हैं।
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लाल होती हैं आंखें
पक्षीशास्त्रियों के अनुसार ये कोयल की एक बड़ी प्रजाति है। इनका सिर काला है, ऊपरी मेंटल और नीचे का भाग बैंगनी रंग से चमकीला होता है। आंखें मोती जैसी लाल होती हैं।