मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक सेंधवा किले में 'रानी सती मंदिर' बनाए जाने का बरवानी में पुरजोर विरोध हो रहा है। इस सामाजिक बुराई के महिमामंडन को रोकने के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक अभियान चलाया है।
हैरत की बात है कि कोर्ट की मनाही के बावजूद प्रशासन इस मंदिर के निर्माण को न सिर्फ 10 सालों तक चुपचाप देखता रहा, बल्कि अब इस पर कोई कार्रवाई करने पर भी बेरपवाह दिखा रहा है।
हालांकि प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, सेंधवा के एसडीओ (राजस्व) बीएस कलेश के मुताबिक अब कुछ खास नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'शिकायत तक की गई जब निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका था और मूर्ति की 'प्राण प्रतिष्ठा' 7 फरवरी को होनी है। मैं प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर इसे रोकने में असमर्थ हूं क्योंकि अब यह हजारों लोगों की आस्था का मुद्दा बन चुका है।' साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशासन ने 'अब इसे कानूनी रूप से वैध नहीं माना है और जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।'
प्रशासन के लिए परिस्थितियां और ज्यादा कठिन तब हो गई जब मंगलवार को प्राण प्रतिष्ठा उत्सव के मौके पर राज्य सरकार के मंत्री अंतर सिंह आर्य पहुंचे। आर्य से जब पूछा गया कि क्या वह इसे एक गैरकानूनी प्रथा और सामाजिक बुराई नहीं मानते? तो उन्होंने तुरंत जवाब दिया कि वह 'इसका कड़ा विरोध करते हैं।' तब वह इस उत्सव में शामिल क्यों हुए? तो मंत्री जी ने कहा कि, 'वह दरअसल सेंधवा नगरपालिका में आनंद उत्सव का उद्घाटन करने जा रहे थे, लेकिन सेंधवा नगरपालिका के अध्यक्ष बसंती बाई यादव समेत कुछ गणमान्य लोगों से मिलने के लिए रुक गए।'
उन्होंने कहा कि, 'मेरा इस शोभा यात्रा से कोई लेना-देना नहीं है। मुझे तो यह भी नहीं मालूम था कि इस मंदिर के खिलाफ शिकायत की गई है।'