मध्यप्रदेश में दलित समुदाय के दो वरिष्ठ आईएएस अफसरों का विवाद अब सड़कों पर आ गया है। बृहस्पतिवार को पंचायत ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रमेश थेटे ने आरोप लगाया कि सरकार को सिर्फ उसके चरणों में पड़े रहने वाले दलित आदिवासी पसंद आते हैं। राज्य सरकार का सामाजिक समरसता का दावा फर्जी है। उन्होंने सरकार के सामने तीन मांगे रखी हैं।
पहली मांग पंचायत ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया के इशारे पर उन्हें दिया गया नोटिस वापस हो और दूसरी जुलानिया के खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया जाए और तीसरा जुलानिया को पंचायत ग्रामीण विकास विभाग से हटाया जाए।
थेटे ने चेताया है कि यदि उनकी मांगें नही मानी गईं तो वह आत्महत्या कर लेंगे। उन्होंने कहा, मध्यप्रदेश में रोहित वेमुला कांड रिपीट हो जाएगा।