कृष्णागुरुजी ने कुष्ठरोगियों के साथ मनाया रक्षाबंधन का पर्व
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अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक चिंतक एवं मानवसेवी कृष्णा गुरुजी (कृष्णा कांत मिश्रा) ने इस वर्ष रक्षाबंधन का उत्सव केवल परिवार तक सीमित न रखकर, इंदौर के परदेशीपुरा स्थित बीमा अस्पताल परिसर के कुष्ठ रोगी सेवा सदन में रहने वाली बहनों के साथ मनाया। वहां बहनों ने उन्हें राखी बांधी, जिसके बाद उन्हें साड़ियां व मिठाइयां वितरित की गईं।
सात वर्षों से जारी परंपरा
कृष्णा गुरुजी ने 2018 में संकल्प लिया था कि परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद वे समाज के उपेक्षित एवं वंचित वर्गों के साथ भी खुशी बांटेंगे। इसी संकल्प के तहत वे लगातार सातवें वर्ष कुष्ठ रोग से पीड़ित बहनों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद समाज के उपेक्षित वर्गों को खुशी से अछूता न छोड़ें। यदि उनकी ओर कोई नहीं है, तो हम सब उनके करीब हैं। कृष्णा गुरुजी ने कहा कि जब कोई उपेक्षित बहन हमारे हाथ पर राखी बांधती है, तो हम केवल एक धागा नहीं बांधते, बल्कि उसके सम्मान, सहयोग एवं सामाजिक सुरक्षा की जिम्मेदारी भी स्वीकारते हैं।
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कृष्णा गुरुजी ने बहनों को उपहार स्वरूप साड़ियां और मिठाई वितरिंत की।
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त्योहारों को मानव सेवा से जोड़ना
कृष्णा गुरुजी मानते हैं कि सकारात्मक सोच को संकल्प बनाकर निरंतर कार्य किया जाए, तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन आता है। उन्होंने कहा कि मैं तो त्योहारों को नहीं बदलता, बल्कि यह समझाने का प्रयास करता हूं कि हम उन उत्सवों को किस उद्देश्य से मनाते हैं, और वह उद्देश्य मानव सेवा से जुड़ा हो। कुष्ठ सेवा सदन के गंगारामजी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कृष्णा गुरुजी समय-समय पर हमारे बीच आते हैं, हमारे साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं और अपनत्व का अनुभव कराते हैं। उनका आगमन यहां रहने वाले सभी को परिवार जैसा अहसास देता है। कार्यक्रम में पिंकू यादव, उमापति पांडे, राजेश पंडित तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और बहनों के साथ समय बिताया।
समाज से अपील
कृष्णा गुरुजी ने अनुरोध किया कि प्रत्येक व्यक्ति परिवार के साथ त्योहार मनाने के बाद अपने आस‑पास के उपेक्षित, असहाय, दिव्यांग, वृद्ध या रोग‑प्रभावित लोगों के साथ भी खुशी बांटे। सेवा के लिए बड़े साधनों की आवश्यकता नहीं होती। किसी उपेक्षित व्यक्ति के साथ बैठकर उसे उत्सव की खुशी में सम्मिलित करना ही सच्ची मानव सेवा है।