विश्व हिंदी सम्मेलन के समापन भाषण में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंदी को निश्चित तौर पर संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए 177 राष्ट्रों का समर्थन हासिल किया जा सकता है तो हिंदी के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। हमें इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोशिश करनी चाहिए। इस मौके पर विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने बताया कि अगला विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरीशस में होगा।
इसके साथ ही गृह मंत्री ने हिंदी को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों से अपने उत्पादों पर हिंदी के साथ ही क्षेत्रीय भाषा और इंग्लिश में भी नाम लिखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वह यह थोप नहीं रहे हैं लेकिन सभी को इस पर विचार करना चाहिए। हमारे नेतृत्व की कमी के कारण हिंदी राष्ट्र भाषा नहीं बन पाई। क्षेत्रीय भाषा पर राजनीति करने वाले नेता भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
हम आजादी के इतने सालों बाद भी हिंदी को स्थान नहीं दिला पाए हैं। कोई अन्य भाषा हिंदी जितनी वैज्ञानिक नहीं है। हिंदी ने आजादी की लड़ाई में सबको एक किया है। ज्यादा बोले जाने के कारण हिंदी सभी भाषाओं के नजदीक है।
हिंदी भारतीय भाषाओं की बड़ी बहन है। कंपनियां आर्थिक कारणों से हिंदी को बढ़ावा दे रही हैं। हिंदी राजभाषा के साथ-साथ संपर्क की भाषा भी है।