प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने हिंदी को विश्व विरासत कहते हुए इसे भविष्य की जरूरत भी बताया।
मोदी ने कहा कि डिजिटल वर्ल्ड में आने वाले सालों में अंग्रेजी, चीनी के बाद हिंदी का ही बोलबाला होगा। दुनियाभर के देशों में हिंदी को बढ़वा मिल रहा है वहां हिंदी को प्रमुख विषय के रूप में पढ़ाया भी जाने लगा है।
रूस और चीन जैसे देशों में आज काफी संख्या में हिंदी बोली जा रही है। वहीं अपने दिनों को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने चाय बेचते बेचते हिंदी सीखी और इसी भाषा की बदौलत ही वे आज यहां तक पहुंचे। हिंदी के कारण ही मैं अपनी बात देशवासियों तक पहुंचा पाया। कहा, हिंदी की विरासत को संभालने की जिम्मेदारी अब भावी पीढ़ी पर है।
भैंस खरीदने वालों को देखकर सीखी हिंदी
पीएम ने बताया कि मैं गुजरात में जन्मा मेरी मातृभाषा गुजराती थी इसलिए मुझे हिंदी नहीं आती थी। जब मैं चाय बेचता था तो मेरे गांव में यूपी के व्यापारी जो मुंबई में रहकर दूध का काम करते थे वो भैंस खरीदने आया करते थे।
भैंसों को वो माल गाड़ी के डिब्बो में ले जाया करते थे और मैं स्टेशन पर चाय बेचने जाया करता था। लेकिन हिंदी न आने के कारण मैं उनसे सही से बात नहीं कर पाता था। मजबूरी में मुझे हिंदी सीखनी पड़ी जिससे मैं उन्हें चाय भी बेचा करता था और हिंदी में बात भी करता था।
मोदी ने कहा कि आज मुझे हिंदी नहीं आती तो पता नहीं मैं कहां होता। मैं विदेश यात्राओं पर जाता हूं तो वहां हिंदी का क्रेज देखकर खुशी होती है। चीन और रूस जैसे देशों में खूब हिंदी बोलने वाले लोग मिल जाएंगे।
इस्रायल के पीएम ने जब हिंदी में कहा धन्यवाद
उन्होंने एक किस्सा सुनाया कि एक बार उन्होंने इस्रायल के खास पर्व पर उनके प्रधानमंत्री को ट्विटर पर हिब्रु भाषा में बधाई दी। कुछ देर बाद ही मैं यह देखकर अचंभित हो गया कि इस्रायली प्रधानमंत्री ने मुझे हिंदी भाषा में धन्यवाद दिया।
हिंदी के हमारे प्रयास को दुनिया ने भी सराहा। उज्बेकिस्तान में हिंदी शब्दकोश बना है तो मॉरीशस में हिंदी की चेयर स्थापित की गई है। वहीं फिल्मों ने भी हिंदी को बढ़ाने में बहुत योगदान दिया। मध्य एशिया में दशकों से लोग हिंदी फिल्मों के गाने गाते हैं।
तकनीक के जानकार भी मानते हैं कि आने वाले समय में हिंदी बहुत तेजी से अपनी पकड़ बनाई। डिजिटल की दुनिया में भी अंग्रेजी और चीनी के बाद हिंदी का जलवा होगा। लोग आज भारत में तेजी से वाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं इसमें भी अब ज्यादातर हिंदी का प्रयोग किया जाता है।