राजगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने एक प्रकरण में उपभोक्ता का बीमा क्लेम निरस्त करने वाली एक बीमा कंपनी के विरुद्ध निर्णय पारित करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। बीमा कंपनी को क्लेम की राशि ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है।
उक्त प्रकरण में उपभोक्ता की ओर से पैरवी कर रहे अभिभाषक जेपी शर्मा ने बताया कि घटना तीन जुलाई 2022 की रात्रि की है। लोकेश किरार निवासी ग्राम लिम्बोदा तहसील खुजनेर जिला राजगढ़ के स्वामित्व का वाहन टवेरा गाड़ी क्रमांक MP-O4-TA 4953 रात्रि के समय अज्ञात चोर उसके घर के सामने से चुराकर ले गए थे। इसकी रिपोर्ट उपभोक्ता लोकेश किरार द्वारा खुजनेर थाने पर दर्ज की गई। पुलिस थाना खुजनेर द्वारा अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध चोरी का प्रकरण कायम किया गया, प्रकरण में अनुसंधान के दौरान कोई अपराधी पकड़ में नहीं आने से पुलिस थाना राजगढ़ द्वारा न्यायालय राजगढ़ में खात्मा प्रस्तुत किया गया। आवेदक लोकेश किरार द्वारा घटना की सूचना बीमा कंपनी को भी तत्काल दी गई थी।
सूचना के बाद बीमा कम्पनी ने अपने सर्वेयर के माध्यम से आवेदक उपभोक्ता के चोरी गए वाहन की सर्वे रिपोर्ट बुलवाई, जिसमें सर्वेयर द्वारा जांच उपरांत अपनी जांच रिपोर्ट में विशेषकर इस बात का उल्लेख किया गया कि,घटना के समय वाहन का उपयोग किराए पर चलाया जाकर व्यावसायिक रूप से उपयोग किया जा रहा था। इस कारण बीमा कंपनी द्वारा आवेदक उपभोक्ता का क्लेम प्रकरण निरस्त कर दिया गया। जबकि घटना के समय चोरी हुआ वाहन आवेदक उपभोक्ता के घर के सामने दरवाजे पर ही खड़ा हुआ था।
परेशान आवेदक ने राजगढ़ उपभोक्ता आयोग के समक्ष बीमा कंपनी के विरुद्ध सेवा में कमी के आधार पर दो जून 2023 को अधिवक्ता जे.पी.शर्मा के माध्यम से दावा प्रस्तुत किया। इसमें अदालत द्वारा आवेदक के पक्ष में निर्णय पारित किया जाकर उपभोक्ता को उसके चोरी गए वाहन की कीमत 2,99,000 रुपये तथा उक्त राशि पर दावा निरस्ती दिनांक से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के अतिरिक्त 5000 रुपये, आवेदक को हुई मानसिक क्षति एवं 2000 रुपये वाद व्यय के भी दिलाए जाने का आदेश पारित किया गया है। उक्त राशि बीमा कंपनी आवेदक उपभोक्ता को आदेश दिनांक से दो माह की अवधि में भुगतान करेगी।
साथ ही जेपी शर्मा ने कहा कि राजगढ़ उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष सुरेश कुमार चौबे, सदस्य सुरेंद्र कुमार सक्सेना और सदस्य सीमा सक्सेना की अदालत का यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ेगी साथ ही वाहन बीमा कंपनियां उपभोक्ताओं के साथ किसी भी प्रकार से धोखा करने से पहले हजार बार सोचेगी और उपभोक्ता ठगी का शिकार होने से बच जाएंगे।