राजगढ़ जिला मुख्यालय के मुख्य बाजार में शुक्रवार को ठेले पर बैठकर ठोलक हाथ में लिए हुए बजाते हुए निकल रहे दिव्यांग को देखकर हर कोई हैरान था। क्योंकि उसे दिखाई न देने के बाद भी, उसके ठोलक की धाक हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी।
उसी दौरान वहां से गुजर रहे लोगों की नजर उस दिव्यांग पर पड़ी तो उन्होंने उसके बारे में जानकारी हासिल की। उसने बताया कि वह खंडवा जिले का रहने वाला है और बचपन से ही ढोल बजाकर अपना व अपने परिवार का जीवन यापन कर रहा है। साथ ही उसने बताया कि सरकार से उसकी कोई धन दौलत की अपेक्षा नहीं है। उसे बस उसकी आंखो का इलाज चाहिए, ताकि वह दुनिया देख सके और मेहनत करके अपना और अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।
आदर्श दिव्यांग संघ के जिलाध्यक्ष राजेश विश्वकर्मा ने बताया कि देश व प्रदेश सरकार को दिव्यांगजनों की प्रमुख मांगों पर ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि शारीरिक अक्षमता के चलते वो आम व्यक्तियों की तरह काम करके अपना जीवन यापन नहीं कर सकते और आंखों से दिव्यांग व्यक्ति सरकार से केवल अपनी आंखों का इलाज कराना चाहता है। ताकि वह मेहनत और मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का सही तरीके से पालन पोषण कर सके। इस तरह से उसे सड़कों पर अपना हुनर दिखाकर लोगों से मांगने की जरूरत न पड़े। मैंने भी अपने स्तर से प्रदेश शासन को पत्र लिखकर युवक के इलाज के लिए गुहार लगाई है।