नीतू राजपूत ने कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित सहायक संपरीक्षक पटवारी और अन्य पदों हेतु भर्ती परीक्षा 2022 उत्तीर्ण की थी। परीक्षा हॉल में परीक्षा खत्म होने के पश्चात कंप्यूटर स्क्रीन पर उसे 157 अंक प्राप्त हुए थे। लेकिन जब परिणाम घोषित हुए तो 86.1 प्रतिशत अंक मिले, जिसमें वो नॉट क्वॉलीफाई रही। ऐसे में नीतू के पिता सुरेश राजपूत ने कर्मचारी चयन मंडल आयोग में परीक्षा परिणाम के संबंध में शिकायती आवेदन देकर संशोधन करने की मांग की है।
अमर उजाला ने जब इस मामले में नीतू से बात की तो नम आंखों से बात करते हुए नीतू राजपूत बताती हैं कि मैंने 21 मार्च 2023 को पटवारी की परीक्षा दी थी, जिसमें मेरा परीक्षा सेंटर श्री वैष्णव पॉलीटेक्निक कॉलेज इंदौर था। जहां मुझे कंप्यूटर स्क्रीन पर 157 नंबर मिले थे और परीक्षा के बीच में दो बार कंप्यूटर बंद भी हुए। वहीं परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद मुझे 87.3 नंबर मिले और नॉर्मलाइजेशन के बाद 86.1 रह गए। कहां गए मेरे नंबर, चार साल की मेहनत है मेरी। मैं एक किसान की बेटी हूं और गरीब परिवार से हूं, घर की जिम्मेदारियां भी हैं मेरी, फर्जीवाड़ा चल रहा है, सिर्फ मेरा ही नहीं और भी लोगों के केस देखने को मिले हैं।
लाड़ली बहना योजना पर सवाल...
साथ ही नीतू ने मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओ में से एक मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा, मुख्यमंत्री आप इस तरह से जो योजना चला रहे हैं, उसमें हम जैसी लाड़लियों का गला काटा जा रहा है। हमें कौन न्याय दिलाएगा। वहीं, पिता के द्वारा कर्मचारी चयन मंडल में की गई शिकायत पर नीतू ने कहा कि कुछ नहीं होने वाला अगर कुछ होता तो वो ऐसा करते ही नहीं, इतना कहा और नीतू रोने लगी।
पिता ने क्या बताया...
वहीं, नीतू के पिता सुरेश राजपूत ने भी अपनी बिटिया नीतू राजपूत का समर्थन करते हुए कहा कि मेरी बेटी ने जो परीक्षा दी थी। उसमें उसे 157 नंबर स्क्रीन पर दिखाए गए, लेकिन जब परिणाम आया तो केवल 86.1 नंबर दिए गए। ये कंहा का न्याय है, मेरी बेटी जैसी कई गरीब की बेटियों का गला काटकर मुख्यमंत्री शिवराज लाड़ली बहना योजना चला रहे हैं। मैंने कर्मचारी चयन मंडल में मामले की शिकायत भी की है और आरटीआई के माध्यम से जानकारी भी मांगी गई है।
साथ ही उन्होंने बताया कि यह सब कुछ सिर्फ मेरी बेटी ही नहीं, बल्कि और भी ऐसे साक्ष्य हैं, जिनके साथ ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा कि निपानियागड़ी गांव से एक आदिवासी बालक के साथ भी ऐसा ही हुआ है। 124 में से उसे भी केवल 76 अंक प्राप्त हुए है, जबकि उसकी भी कंप्यूटर स्क्रीन पर 124 अंक बताए गए थे। इसके अतिरिक्त जब मैं मामले से संबंधित शिकायती आवेदन देने के लिए कर्मचारी चयन आयोग भोपाल गया, तब भी वहां मुझे देवास जिले की एक बालिका मिली, उसे भी कंप्यूटर स्क्रीन पर 158 अंक बताए गए, लेकिन उसे मिले मात्र 76 अंक।
नीतू के पिता के बताने पर अमर उजाला की टीम जब नरसिंहगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले निपानियागड़ी गांव निवासी आदिवासी छात्र पंकज भिलाला के पास पहुंची तो उसने बताया कि मैंने 24 मॉर्च 2023 को पटवारी की परीक्षा दी थी। इंदौर में ही मेरा सेंटर था, मुझे भी स्क्रीन पर 124 नंबर दिखाए गए और जब रिजल्ट आया तो उसमें मेरे 86 नंबर आए। नॉर्मलाइजेशन के बाद वे भी 76 हो गए, जिसके बाद से मेरा सरकारी नौकरी पर से ही विश्वास उठ गया और मैंने तैयारी करना ही छोड़ दिया। इससे अच्छा तो मैं गांव में खेती बाड़ी करूंगा। क्योंकि कोई नतीजा नहीं निकला, इतनी तैयारी की और सब कुछ व्यर्थ नज़र आ रहा है। मेरे घर की हालत बहुत दयनीय है, मेरे पिताजी नही हैं, सिर्फ मां है और इतनी मेहनत करने के बाद भी मेरा सेलेक्शन नहीं हुआ और मुझसे कम नंबर वालों का सेलेक्शन हो गया ऐसा क्यों हुआ सर।
मामले का राजनीतिकरण हुआ...
मामले के बाहर आते ही राजनीति भी गरमा गई और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को ट्वीट करते हुए कहा कि एक और व्यापम, यहां भी एक ब्लैक लिस्टेड कंपनी को ठेका दिया। व्यापम को नीतू की शिकायत का तत्काल निराकरण करना चाहिए, यह भी बड़ा संयोग है, जितने व्यापम में घपले होते हैं, वो सब भाजपा नेताओं के द्वारा हो रहे हैं, भाजपा ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। ऐसे में अब यह भी एक बड़ा सवाल है कि क्या राजगढ़ जिले की नीतू और उसके जैसे और भी लोगों के साथ इंसाफ होगा या उसके आंसू सिर्फ राजनीतिक मुद्दा ही बनकर रह जाएंगे।
आखिर क्या है व्यापम घोटाला...
विकिपीडिया से ली गई जानकारी के अनुसार, व्यापम घोटाला भारतीय राज्य मध्यप्रदेश से जुड़ा प्रवेश एवं भर्ती घोटाला है, जिसके पीछे कई नेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और व्यवसायियों का हाथ है। मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल अथवा व्यापम (व्यावसायिक परीक्षा मण्डल) राज्य में कई प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए जिम्मेदार राज्य सरकार द्वारा गठित एक स्व-वित्तपोषित और स्वायत्त निकाय है। ये प्रवेश परीक्षाएं, राज्य के शैक्षिक संस्थानों में तथा सरकारी नौकरियों में दाखिले और भर्ती के लिए आयोजित की जाती हैं। इन प्रवेश परीक्षाओं में तथा नौकरियों में अपात्र परीक्षार्थियों और उम्मीदवारों को बिचौलियों, उच्च पदस्थ अधिकारियों एवं राजनेताओं की मिलीभगत से रिश्वत के लेन-देन और भ्रष्टाचार के माध्यम से प्रवेश दिया गया एवं बड़े पैमाने पर अयोग्य लोगों की भर्तियां की गई।
इन प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों को 1990 के मध्य के बाद से सूचित किया गया था और पहली एफआईआर 2001 में दर्ज हुई। इसके लिए राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए एक समिति कि स्थापना की। समिति ने 2011 में अपनी रिपोर्ट जारी की और एक सौ से अधिक लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था तथा कई अब भी फरार हैं।
व्यापम घोटाले की व्यापकता साल 2013 में तब सामने आई, जब इंदौर पुलिस ने 2001 की पीएमटी प्रवेश से जुड़े मामलों में 20 नकली अभ्यर्थियों को गिरफ़्तार किया, जो असली अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने आए थे। इन लोगों से पूछताछ के दौरान जगदीश सागर का नाम घोटाले के मुखिया के रूप में सामने आया, जो एक संगठित रैकेट के माध्यम से इस घोटाले को अंजाम दे रहा था। जगदीश सागर की गिरफ़्तारी के बाद राज्य सरकार ने 26 अगस्त 2013 को एक विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की स्थापना की और बाद की जांच और गिरफ्तारियों से घोटाले में कई नेताओं, नौकरशाहों, व्यापम अधिकारियों, बिचौलियों, उम्मीदवारों और उनके माता-पिता की घोटाले में भागीदारी का पर्दाफाश हुआ।
दो हजार से अधिक लोग हुए गिरफ्तार...
बता दें कि जून 2015 तक 2000 से अधिक लोगों को इस घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और एक सौ से अधिक अन्य राजनेता भी शामिल हैं। जुलाई 2015 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने देश के प्रमुख जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को मामले की जांच स्थानांतरित करने के लिए एक आदेश जारी किया। अगर कांग्रेस पार्टी के विचारों को प्राथमिकता दी जाए तो व्यापम घोटाले के दोषी लक्ष्मीकांत शर्मा और मुख्य रूप से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह हैं, जिनमें से स्वसत्ता के चलते मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मुख्यमंत्री शिवराज ने व्यापम घोटाले को दबाने के लिए भोपाल में ही एक फर्जी एनकाउंटर करवा दिया।