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एमपीपीएससी के नतीजे: रायसेन जिले के दो युवा बने अधिकारी, दोनों ने गरीबी से जूझते हुए पाई कामयाबी

Sun, 09 Nov 2025 09:09 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायसेन

सार

रायसेन जिले के भुवनेश चौहान और लोकेश साहू ने एमपीपीएससी परीक्षा में सफलता पाकर जिले का नाम रोशन किया। भुवनेश गरीब परिवार से उठकर एसडीएम बने, उनके पिता नाश्ते की दुकान चलाते थे। वहीं लोकेश, जिनके पिता आटा चक्की चलाते हैं, जनपद सीईओ पद पर चयनित हुए।
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रायसेन के भुवनेश और लोकेश ने सफलता पाई है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जहां चाह वहां राह शिक्षा किसी चीज की मोहताज नहीं यही चरितार्थ किया है रायसेन जिले के दो युवाओं ने। इनमें से एक भुवनेश चौहान गरीबी से ऊपर उठकर प्रशासनिक अधिकारी का पद पाया है। अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में रहकर करने बाले भुवनेश 10 वीं क्लास पास कर भोपाल चले गए। यहां रहकर पढ़ाई की। इसके बाद एमपीपीएससी परीक्षा की तैयारी इंदौर ओर भोपाल में रहकर की। अब उन्होंने एसडीएम का पद हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया। वहीं, गैरतगंज के लोकेश का भी एमपीपीएसई परीक्षा से जनपद सीईओ के पद पर चयन हुआ। है। 
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आटा चक्की चलाते हैं लोकेश के पिता
रायसेन जिले के गैरतगंज के लोकेश साहू ने एमपीपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है। उनका चयन जनपद सीईओ के पद पर हुआ है। लोकेश साहू ने बताया कि यह उनका चौथा प्रयास था। लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने यह सफलता पाई। उनके पिता जीवन साहू गैरतगंज में आटा चक्की की दुकान चलाते हैं। लोकेश की प्रारंभिक शिक्षा एचपी पब्लिक हायर सेकंडरी स्कूल से हुई। वे कक्षा 12वीं में एमपी टॉपर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने इंदौर से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।

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डीएसपी का प्रशिक्षण ले रहे भुवनेश
रायसेन जिले के ग्राम गुगलवाड़ा से भुवनेश चौहान ने प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त कर एसडीएम बनकर गुगलवाड़ा ग्राम सहित जिले का नाम रोशन किया भुवनेश चौहान का बीते वर्ष डीएसपी में सेलेक्शन हुआ था वर्तमान में भुवनेश चौहान पुलिस अकादमी भोपाल में प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके पहले भी भुवनेश चौहान पटवारी में चयनित हुए थे। बैतूल में पटवारी बनकर तीन माह काम भी किया, तब ही वन विभाग में एसडीओ के लिए भी चयन हुआ, लेकिन उस को ज्वाइन नहीं किया। उसके बाद वे डीएसपी बने। लगातार प्रतियोगी परीक्षाएं देकर भुवनेश आखिरकार प्रशासनिक सेवा में आ ही गए एक छोटे से गांव से निकलकर भुवनेश ने अपने माता पिता का नाम रोशन किया। 
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पिता चलाते हैं नाश्ते की दुकान
भुवनेश चौहान के पिता शेर सिंह चौहान की गांव में नाश्ते की दुकान है। समोसा बनाने बाले शेर सिंह आज बहुत खुश हैं और खुशी होना भी चाहिए। चार बच्चों के पिता शेर सिंह बताते हैं कि दो बेटी जिनकी शादी हो चुकी है। दोनों बेटे छोटा इंजीनियर है, तो बड़ा बेटा अब एसडीएम बन गया है। हालांकि, अब भुवनेश ने अपने पिता को समोसा बनाने का काम बंद करवा दिया है।
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