सीहोर जिले में अघोषित बिजली कटौती अब प्रशासन और बिजली वितरण कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। भीषण गर्मी, पेयजल संकट और घंटों बिजली गुल रहने से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। कहीं ग्रामीण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो कहीं किसान कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं।
मंगलवार को बिजौरी गांव में बिजली कटौती के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। घंटों बिजली गुल रहने और लगातार ट्रिपिंग से परेशान ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई। पूर्व सरपंच दीपेश राठौर ने कहा कि गांव में बिजली आने-जाने का कोई तय समय नहीं है। लोग पूरी रात जागने को मजबूर हैं। गर्मी से हालात बदतर हैं और बिजली विभाग केवल आश्वासन दे रहा है।
स्थिति तनावपूर्ण होते देख मंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। टीआई सुनील मेहर ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर ग्रामीणों को समझाइश दी। वहीं विद्युत विभाग की ओर से एई सतीश चौहान ने ग्रामीणों से चर्चा कर जल्द व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया। प्रदर्शन में पूर्व सरपंच दीपेश राठौर, जनपद सदस्य जितेंद्र वर्मा, सरपंच प्रतिनिधि राकेश वर्मा, पूर्व सैनिक निकेश मेवाड़ा, पम्पू वर्मा, सोनू राठौर और पदम वर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे में बिजली व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
करणी सेना युवा शक्ति ने भी खोला मोर्चा
बिजली संकट को लेकर करणी सेना युवा शक्ति ने भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राजपूत के नेतृत्व में सोमवार को एक दर्जन गांवों के किसान और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। अलाहाखेड़ी, मोगराराम, हसनाबाद जहांगीरपुर, नयापुरा, धबोटी, धामनखेड़ा, खामलिया, पचामा और थूना समेत कई गांवों के लोगों ने बिजली कंपनी पर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। कुलदीप सिंह राजपूत ने चेतावनी दी कि यदि 72 घंटे के भीतर अघोषित बिजली कटौती बंद नहीं हुई तो जिलेभर में चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और बिजली कंपनी की होगी।
पेयजल संकट, पढ़ाई और सिंचाई पर असर
कलेक्टर ने अधिकारियों की लगाई क्लास