पंजाब नेशनल बैंक समेत करीब 24 बैंकों ने जूम डेवलपर्स और उसकी सहयोगी फर्म से 3000 करोड़ रुपये की वसूली के लिए इंदौर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कंपनी के प्रमोटर विजय चौधरी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में पहले से ही जांच कर रही है।
यह फर्म पैसे देने में विफल हो गई है इसलिए बैंकों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि वह जूम डेवलपर्सए और उसकी सहयोगी कंपनियों की संपत्तियों को सीज कर पैसा वसूली करे।
बैंक लोन वसूली के लिए अधिकृत अधिकारी एसडीएम संदीप सोनी ने कहा है कि, 'जूम डेवलपर्सए और उसकी सहयोगी कंपनियां 30 हजार करोड़ रूपये से ज्यादा के लोन और जुर्माना की दोषी है। यह कर्ज 24 बैंकों से लिए गए थे।'
जूम डेवलपर्स प्रोजेक्ट डेवलप और मैनेजमेंट की कंपनी है। जूम डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और मुख्य संचालक विजय चौधरी को ईडी ने पिछले साल दो मई को 26 बैंकों से 2,650 करोड़ रुपये के कर्ज बकाया मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की एक केस की जांच के दौरान गिरफ्तार किया था।
चौधरी को स्पेशल ईडी कोर्ट ने जमानत दे दी थी लेकिन सीबीआई द्वारा दायर केस वह अभी भी जेल में है। नियमों के मुताबिक प्रशासन को बकाएदार से बैंक कर्ज के रूप में वसूल किए गए कुल मूल्य का लगभग 2.5 फीसदी रकम मिलती है।
इस तरह, अगर प्रशासन जूम डेवलपर्स और उसकी सहयोगी कंपनियों से बकाया राशि वसूल कर पाती है तो प्रशासन को करीब 75 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। यह रकम साल भर में होने वाले कुल राजस्व से भी ज्यादा है।