मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में सोमवार को एक जनहित याचिका दायर कर हाल ही में सामने आए हनी ट्रैप मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंपे जाने की गुहार लगाई गई है। याचिका में आशंका जताई गई है कि सूबे के राजनेताओं के दखल से इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण की जारी पुलिस जांच पर असर पड़ सकता है। वहीं इसकी जांच के लिये विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। वहीं इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले इंदौर नगर निगम के एक आला अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने इंदौर में दर्ज किये गये हनी ट्रैप (मोहपाश) मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के लिये विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा यहां सोमवार को इस मामले में अधिकृत तौर पर बताया गया है कि इन्दौर के पलासिया पुलिस थाना क्षेत्र में 17 सितंबर को एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किये गये मामले की जांच के लिये पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने एसआईटी गठित कर दी है।
एसआईटी का गठन पुलिस मुख्यालय में पदस्थ पुलिस महानिरीक्षक, (अपराध अनुसंधान) डी श्रीनिवास वर्मा के नेतृत्व में किया गया है। पुलिस महानिदेशक ने इस घटना के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।
गौरतलब है कि पुलिस ने इंदौर नगर निगम के अधीक्षण इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर हनी ट्रैप गिरोह का खुलासा किया था। गिरोह की पांच महिलाओं समेत छह सदस्यों को भोपाल और इंदौर से गिरफ्तार किया गया था।
नगर निगम अधिकारी ने पुलिस को बताया कि गिरोह ने उनके कुछ आपत्तिजनक वीडियो क्लिप वायरल करने की धमकी देकर उनसे तीन करोड़ रुपये की मांग की थी। ये क्लिप खुफिया तरीके से तैयार किये गये।
हनी ट्रैप मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले इंदौर नगर निगम के एक आला अधिकारी को अनैतिक कार्य में शामिल होने के आरोप में सोमवार को पद से निलंबित कर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम प्रशासन ने इस शहरी निकाय के अधीक्षण इंजीनियर हरभजन सिंह को वर्ष 1965 के मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत निलंबित किया।
निलंबन आदेश में कहा गया कि "अनैतिक कृत्य (हनी ट्रैप मामले) में सिंह की कथित संलिप्तता पहली नजर में अशोभनीय होने के साथ नैतिक पतन की परिचायक है। इस कारण उनकी पेशेवर कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है।"
इस बीच, पुलिस को जांच में कुछ नये सुराग मिलने के बाद इस मामले के तार कई स्थानों से जुड़ गये हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रुचिवर्धन मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया, "पुलिस हिरासत में गिरोह की दो महिला आरोपियों से पूछताछ की गयी है। जांच में हमें कुछ नये सुराग भी मिले हैं। इनके आधार पर हम भोपाल, राजगढ़, छतरपुर और अन्य स्थानों पर जांच को आगे बढ़ा रहे हैं।"
उन्होंने बताया कि जांच के दौरान यह भी पता चला है कि गिरोह की महिला आरोपियों ने मोहपाश की वारदात के लिये इंदौर के दो होटलों में ठहरने के दौरान फर्जी पहचान पत्र प्रस्तुत किये थे।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक गिरोह पर संदेह है कि वह राजनेताओं और नौकरशाहों समेत कई प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसा चुका है। इस बारे में विस्तृत जांच जारी है।
गिरोह के गिरफ्तार आरोपियों में श्वेता विजय जैन के अलावा, आरती दयाल, मोनिका यादव, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी और उनका चालक ओमप्रकाश कोरी शामिल हैं।
गौरतलब है कि गिरोह के छह गिरफ्तार आरोपियों में शामिल आरती दयाल (29) और मोनिका यादव (18) की पुलिस हिरासत अवधि एक स्थानीय अदालत ने कल रविवार को 28 सितंबर तक के लिये बढ़ा दी थी।