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MP News: 434 साल बाद खुला इतिहास का खजाना! पन्ना के मंदिर में मिली 'रसिकप्रिया' की दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि

Fri, 10 Jul 2026 11:03 AM IST
पन्ना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पन्ना

सार

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में चल रहे ज्ञान भारतम् अभियान के तहत महाकवि आचार्य केशवदास द्वारा वर्ष 1591 ईस्वी में रचित प्रसिद्ध ग्रंथ 'रसिकप्रिया' की दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है।
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434 साल पुरानी 'रसिकप्रिया' की हस्तलिखित पांडुलिपि ने बढ़ाई शोधकर्ताओं की उत्सुकता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में चल रहे ज्ञान भारतम् अभियान के तहत पन्ना जिले से भारतीय इतिहास और हिंदी साहित्य से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खोज सामने आई है। जिले के श्री राम-जानकी मंदिर में महाकवि आचार्य केशवदास द्वारा वर्ष 1591 ईस्वी में रचित प्रसिद्ध ग्रंथ 'रसिकप्रिया' की दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि मिली है। इसे हिंदी साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर माना जा रहा है। अभियान के दौरान सैकड़ों वर्ष पुरानी कई अन्य पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज भी सामने आए हैं, जिनके संरक्षण और डिजिटाइजेशन की तैयारी शुरू कर दी गई है।
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1591 की 'रसिकप्रिया' बनी सबसे बड़ी खोज

ज्ञान भारतम् अभियान के दौरान पन्ना के श्री राम-जानकी मंदिर में महाकवि आचार्य केशवदास की वर्ष 1591 ईस्वी में लिखी गई प्रसिद्ध कृति 'रसिकप्रिया' की हस्तलिखित प्रति मिली है। 'रसिकप्रिया' हिंदी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में गिनी जाती है। इसमें श्रृंगार रस, नायिका-भेद और काव्य सौंदर्य का विस्तृत वर्णन मिलता है। चार सौ वर्ष से अधिक पुरानी इस पांडुलिपि का सुरक्षित मिलना हिंदी साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक इतिहास के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

64 स्थानों से मिलीं सैकड़ों साल पुरानी पांडुलिपियां

ज्ञान भारतम् अभियान के तहत पन्ना जिले के घरों, मंदिरों और निजी संग्रहों में व्यापक खोज अभियान चलाया गया। इस दौरान जिले के 64 अलग-अलग स्थानों से करीब 300 से 400 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज मिले हैं। इनमें लगभग 220 वर्ष पुरानी श्रीमद्भागवत महापुराण की हस्तलिखित पांडुलिपि, प्राचीन विश्व मानचित्र और कई दुर्लभ धार्मिक व ऐतिहासिक ग्रंथ शामिल हैं। इसके अलावा प्रणामी संप्रदाय, जैन समुदाय और हिंदू धर्म से जुड़े भागवत गीता, पुराण सहित कई महत्वपूर्ण हस्तलिखित ग्रंथ भी मिले हैं।
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पन्ना में मिली 16वीं सदी की अनमोल पांडुलिपि - फोटो : अमर उजाला
बाजीराव पेशवा से जुड़ा हस्तलिखित पत्र भी आया सामने

अभियान के दौरान जिले के एक शास्त्री परिवार के संग्रह से वर्ष 1915 का बाजीराव पेशवा से जुड़ा हस्तलिखित पत्र भी मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दस्तावेज उस दौर के सामाजिक और प्रशासनिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा तत्कालीन राजाओं, रियासतों और विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े कई दुर्लभ दस्तावेज भी खोजे गए हैं।

अब होगा डिजिटाइजेशन, बनाई गई पांच सदस्यीय समिति

ज्ञान भारतम् अभियान केवल पुरानी पांडुलिपियों की खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका वैज्ञानिक संरक्षण भी इसका प्रमुख उद्देश्य है। पन्ना कलेक्टर ने इन दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति सभी पांडुलिपियों को एकत्र कर उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस अमूल्य विरासत से जुड़ सकें और देश-विदेश के शोधकर्ताओं को भी इन दस्तावेजों का लाभ मिल सके।
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दुर्लभ पांडुलिपि ने सबको चौंकाया - फोटो : अमर उजाला
भारतीय सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया आयाम

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन सभी पांडुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटाइजेशन किया गया तो भारतीय इतिहास, साहित्य, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान पर नए शोध के रास्ते खुलेंगे। पन्ना में मिली वर्ष 1591 की 'रसिकप्रिया' की हस्तलिखित प्रति को ज्ञान भारतम् अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। यह खोज न केवल भारत की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई पहचान देगी, बल्कि पन्ना की ऐतिहासिक धरोहर को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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