कितने मजदूर काम कर रहे थे?
बताया जा रहा है कि कुएं के अंदर कुल सात मजदूर काम कर रहे थे। तभी दो मजदूर पानी पीने के लिए ऊपर आए। जैसे ही वे कुएं से बाहर निकले, उसी दौरान कमजोर मिट्टी अचानक ढह गई। अंदर काम कर रहे पांचों मजदूर मलबे में दब गए। इस हादसे में दो मजदूरों की जान बाल-बाल बच गई। प्रत्यक्षदर्शी मजदूरों ने बताया कि सब कुछ कुछ ही सेकंड में हो गया। जब तक कोई कुछ समझ पाता, मिट्टी का बड़ा हिस्सा कुएं में भर गया और पांच साथी उसके नीचे दब गए।
कितने घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन?
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचा और करीब तीन घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। जेसीबी और स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मलबे से आशीष यादव, राजकुमार यादव, रामपाल यादव, चुन्नू यादव और चुनवाद पाल के शव बाहर निकाले गए। जानकारी के मुताबिक, हादसे में मरने वालों में एक ही परिवार के चार सदस्य शामिल हैं। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
कैसे हुआ हादसा?
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि कुएं की मिट्टी काफी भुरभुरी और कमजोर थी। इसके बावजूद गहरी खुदाई की जा रही थी। हादसे के बाद सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर उषा परमार और एसपी निवेदिता नायडू मौके पर पहुंचीं। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर सांत्वना दी और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए अजयगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हुए प्रत्येक परिवार को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।