पन्ना में घोर लापरवाही की तस्वीर... बोरियों मे रखी धान हो गई अंकुरित
- फोटो : अमर उजाला
पन्ना जिले में सरकारी अनाज की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वेयरहाउस कॉरपोरेशन की कथित लापरवाही के चलते किसानों से खरीदा गया हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है। जिले के बड़ागांव और लक्ष्मीपुर खरीदी केंद्रों में बारिश के बीच धान का उचित भंडारण नहीं किया गया, जिससे अनाज में नमी आ गई और कई जगहों पर धान के ढेरों से पौधे तक उग आए हैं। यह तस्वीरें सरकारी व्यवस्था की लापरवाही और अनाज संरक्षण के दावों की हकीकत बयां कर रही हैं।
सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदकर उसे सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों को सौंपती है, ताकि जरूरत पड़ने पर यही अनाज सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य योजनाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंच सके। लेकिन पन्ना जिले के बड़ागांव और लक्ष्मीपुर खरीदी केंद्रों में हालात इसके बिल्कुल उलट दिखाई दे रहे हैं। यहां हजारों क्विंटल धान लंबे समय से खुले आसमान के नीचे पड़ा है। लगातार हो रही बारिश और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण धान खराब होने लगा है। कई ढेरों में नमी इतनी बढ़ गई कि उनमें पौधे तक उग आए हैं। यह स्थिति न केवल सरकारी लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि सरकारी खजाने को लाखों रुपये के संभावित नुकसान का संकेत भी देती है।
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पन्ना में खुले में पड़ा हजारों क्विंटल धान
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अधिकारियों ने कही कार्रवाई की बात
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर धान का उठाव कर सुरक्षित वेयरहाउस में भंडारण कराया जाता, तो आज यह नौबत नहीं आती। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा अब सरकारी अनाज और जनता के पैसे को भुगतना पड़ रहा है।
मामला सामने आने के बाद खाद्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि शिकायत और जानकारी उनके संज्ञान में आई है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वेयरहाउस की लापरवाही की बात कही जा रही है।
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सबसे बड़ा सवाल कैसे हुई चूक
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसानों की मेहनत से पैदा किया गया अनाज सरकार खरीद चुकी थी, तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने में आखिर चूक कैसे हुई? खुले आसमान के नीचे सड़ते इस सरकारी धान और उससे उग आए पौधे साफ बता रहे हैं कि लापरवाही कितनी गंभीर है। अब देखना होगा कि जांच के बाद केवल कार्रवाई की घोषणा होती है या फिर इस नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों की वास्तविक जवाबदेही भी तय की जाती है।