प्रसूति महिलाओं को नहीं मिल रहे बेड
सबसे अधिक परेशानी प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। अस्पताल के प्रसूति वार्ड में पलंगों की कमी के कारण कई महिलाओं को जमीन पर लेटकर इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में भी उन्हें पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी है।
प्रसूति वार्ड में बंद पड़े हैं एसी, पंखे भी नहीं कर रहे काम
अस्पताल के प्रसूति वार्ड की स्थिति भी चिंताजनक है। वार्ड में लगे एसी बंद पड़े हैं और कई पंखे भी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। उमस और गर्मी के बीच मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वार्ड में चारों ओर गंदगी का आलम है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। ऐसे माहौल में नवजात शिशुओं और प्रसूताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
गर्मी से बेहाल परिजन गैलरी में लेटने को मजबूर
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी दावों तक सीमित हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाओं में सुधार किया जाता, तो मरीजों को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने और अस्पतालों को सम्मानित करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोलती नजर आती है। पुरस्कार मिलने के बावजूद यदि मरीजों को बिस्तर, स्वच्छ वातावरण और मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, तो यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चिंता का विषय है।
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अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक माह में 22 नवजात शिशुओं की मौत के बाद भी जिम्मेदार कब जागेंगे? क्या अस्पताल की व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों में ही बेहतर हैं या मरीजों को भी इसका वास्तविक लाभ मिलेगा? फिलहाल पन्ना जिला अस्पताल की तस्वीरें स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की गंभीर खामियों की ओर इशारा कर रही हैं।