कटनी जिले में धान खरीदी का बड़ा घोटाला सामने आया है। धान खरीदी समितियों व राइस मिलर्स ने मिलीभगत कर कागजों में करोड़ों रुपये की धान खरीदी करना बताया गया। शिकायत पर तीन राइस मिलर्स व धान खरीदी समितियों के कर्मचारी के खिलाफ दो थानों में तीन एफआईआर दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि धान घोटाले के संबंध में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव फैज अहमद किदवई को गोपनीय शिकायत मिली थी। उनके निर्देश पर नागरिक आपूर्ति निगम (रीवा) के जिला प्रबंधक संजय सिंह, नागरिक आपूर्ति निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक (जबलपुर) एलएल अहिरवार, जिला आपूर्ति अधिकारी (कटनी) बालेंद्र शुक्ला और कटनी प्रबंधक मधुर खर्द को जांच के निर्देश दिए थे। टीम द्वारा जांच में मिलर्स के गोदामों में खरीदी गयी धान नहीं मिली।
निर्धारित प्रकिया के तहत धान खरीदी केंद्र से खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को खरीदी गई धान की जानकारी भेजी जाती है। विभाग द्वारा इस आधार पर मिलर को डिलीवरी ऑर्डर जारी किया जाता है। डिलीवरी ऑर्डर के आधार पर मिलर केंद्र से धान उठा लेता है। धान उठा लेने के बाद विभाग की ओर से स्वीकृति पत्रक जारी किया जाता है। जिसके आधार पर किसानों को भुगतान कर दिया जाता है। विभाग द्वारा धान खरीदी के लिए 7 करोड़ 67 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। जिसमें से लगभग 60 प्रतिशत धान जांच के दौरान अधिकारियों को मिलर्स के गोदाम में नहीं मिली। ट्रांसपोर्टेशन, माल भाड़ा, तुलाई, बारदाना समेत और भी कई मद जिनमें घोटाला हुआ है।
कटनी पुलिस अधीक्षक एसके जैन ने बताया कि टीम को जांच के दौरान लगभग साढ़े चार करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। सरकार द्वारा 1940 रुपये प्रति क्विटंल के हिसाब से धान खरीदी गई थी। जांच में मिलर्स के पास लगभग 2320 मैट्रिक टन धान कम मिली थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए तीन राइस मिलर्स व एक धान खरीदी समिति के कर्मचारियों के खिलाफ दो थाने में तीन प्रकरण दर्ज किए गए हैं। नियम अनुसार मिलर्स को 1 मार्च के बाद धान को मिलिंग के लिए भेजा जाना था। प्रकरण में जांच जारी है और विवेचना में जो व्यक्ति दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।