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Omkareshwar: ब्राह्मण समाज की नाराजगी के बाद विवादित स्लाइड हटाई गई, प्रशासन ने किया स्पष्ट; क्या है मामला?

Wed, 26 Nov 2025 08:10 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर

सार

MP: पंडित-पांडा समाज और सर्व ब्राह्मण प्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि उनके द्वारा सदियों से सेवा दी जा रही है, ऐसे में उन्हें अनधिकृत बताना परंपरा का अपमान है। पंडित हितेश भाटे ने कहा कि मंदिर की ओर से कोई अधिकृत पुजारी नहीं है, तो फिर ऐसी स्लाइड लगाने का उद्देश्य क्या था। पढ़ें।
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ओंकारेश्वर श्रीजी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ओंकारेश्वर श्रीजी मंदिर में पिछले कुछ दिनों से चल रही वह स्लाइड 'किसी भी अनधिकृत व्यक्ति से दर्शन-पूजन, पाठ आदि न करवाएं', ने पंडित-पांडा व ब्राह्मण समाज में नाराजगी उत्पन्न कर दी थी। समाज का कहना था कि इस संदेश के जरिए परंपरागत पंडितों को अनधिकृत बताने की छवि बनी, जो आहत करने वाला है। विरोध के बाद मामला प्रशासन व मंदिर ट्रस्ट तक पहुंचा, जिसके बाद ट्रस्ट ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी पंडित–पुजारी या ब्राह्मण की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। त्रुटिवश संदेश में लिखावट गलत चली गई थी, जिसे अब हटा दिया गया है।

सोमवार को पंडित-पांडा समाज और सर्व ब्राह्मण प्रतिनिधियों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि उनके द्वारा सदियों से सेवा दी जा रही है, ऐसे में उन्हें अनधिकृत बताना परंपरा का अपमान है। पंडित हितेश भाटे ने कहा कि मंदिर की ओर से कोई अधिकृत पुजारी नहीं है, तो फिर ऐसी स्लाइड लगाने का उद्देश्य क्या था। कपिल केलारकर ने बताया कि मंदिर में लगभग 400 पंडित पूजा-पाठ कराते हैं, जबकि सिर्फ तीन पुजारी नियमित आरती करते हैं, ऐसे में स्लाइड के जरिए पंडितों पर संदेह उठाना उचित नहीं।

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देवेश पुरोहित ने कहा कि कई पंडितों पर समय प्रतिबंध लगा है, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। वहीं स्थानीय लोगों को भी सुबह 5 से 9 बजे तक ही मंदिर प्रवेश की अनुमति है। बाद में सभी को आम श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर दर्शन करने पड़ते हैं। समाज ने इसे परंपरागत अधिकारों पर रोक बताते हुए विरोध किया।

मंगलवार को ट्रस्ट व पुनासा एसडीएम एवं मंदिर प्रशासक आईएएस पंकज वर्मा ने मीडिया के सामने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि स्लाइड का उद्देश्य किसी पंडित-पुजारी पर प्रश्न उठाना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को अनधिकृत टिकट एजेंटों व ठगी से बचाना है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के कारण श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया गया था। इसे गलत अर्थ में न लिया जाए। संबंधित स्लाइड हटा दी गई है और पूर्व की तरह सभी पंडित व पुजारी पूजा-पाठ करा सकेंगे।

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