आत्मनिर्भर और समृद्ध पंचायतों के निर्माण को लेकर आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला 'आत्मनिर्भर पंचायत–समृद्ध मध्य प्रदेश 2025' का बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे कंवेंशन सेंटर में सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन सत्र में मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने नई चेतना 4.0-जेंडर कैंपेन का औपचारिक शुभारंभ किया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लोक अधिकार केंद्रों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने की। उन्होंने कहा कि यदि कोई ग्राम पंचायत एक भी कार्य उत्कृष्टता से करती है तो उसकी पहचान स्थायी बन जाती है। उन्होंने जोर दिया कि “आत्मनिर्भर पंचायतों का निर्माण तभी संभव है, जब हर प्रतिनिधि अपनी भूमिका जिम्मेदारी और नवीन सोच के साथ निभाए।
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देवड़ा ने पंचायत प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे विकास के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध प्रयास करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास की ऐसी योजनाएं बनाई गई हैं जो निचले स्तर तक विकास ला सकती हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतों के पास वर्तमान में जितने अधिकार हैं उसका उपयोग कर पंचायतें विकास की गति में तेजी ला सकती हैं। देवड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक देश को आर्थिक रूप से विश्व का समृद्ध देश बनाने का संकल्प लिया है। मध्य प्रदेश इस संकल्प को साकार करने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों को वित्तीय प्रबंधन व्यवस्थाओं में और ज्यादा सुधार करने की आवश्यकता है। साथ ही महिला पंचायत प्रतिनिधियों और महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को भी आगे आने की आवश्यकता है। कार्यशाला में त्रि-स्तरीय पंचायतों के प्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित थे।
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उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि मध्य प्रदेश को समृद्ध बनाने की राह ग्राम पंचायतों से ही होकर गुजरती है। उन्होंने कहा कि पंचायतों का सशक्तिकरण ही राज्य के समग्र विकास की आधारशिला है और आत्मनिर्भर पंचायत पहल निश्चित रूप से जनभागीदारी के माध्यम से व्यापक प्रभाव डालेगी।
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कार्यक्रम में संविधान दिवस के उपलक्ष्य में सभी जनप्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों को भारतीय संविधान की शपथ दिलाई गई। राज्यमंत्री राधा सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यशाला प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और ग्रामीण विकास से जुड़े प्रतिभागियों के लिए सीख, संवाद और योजना निर्माण का प्रभावी मंच सिद्ध हुई। समापन के साथ ही पूरे प्रदेश में आत्मनिर्भर और समृद्ध पंचायतों के लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प और अधिक मजबूत किया गया।