फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Omkareshwar News: मां नर्मदा जयंती पर 19 से 25 जनवरी तक होगा भव्य आयोजन, जलस्तर बढ़ने से सुरक्षा को लेकर चिंता

Sun, 18 Jan 2026 11:11 AM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर

सार

मोरटक्का नर्मदा तट पर मां नर्मदा जयंती का भव्य आयोजन 25 जनवरी को होगा, जिसमें पुष्प वर्षा और महाआरती शामिल है। बढ़ते जलस्तर से आयोजन समिति ने हादसे की आशंका जताई है। प्रशासन ने निरीक्षण कर सुरक्षा, ट्रैफिक और जलस्तर नियंत्रण के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

विज्ञापन
मां नर्मदा का पूजन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

खंडवा-इंदौर-इच्छापुर सड़क मार्ग स्थित मोरटक्का नर्मदा तट के नावघाट खेड़ी एवं खेड़ी घाट में होने वाला यह आयोजन प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है। अनुमान है कि इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां नर्मदा के पावन जल में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करेंगे। 25 जनवरी दोपहर 12:00 बजे मां नर्मदा का जन्म महोत्सव के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा शाम 7:30 बजे मां नर्मदा के तट पर महाआरती का भव्य आयोजन किया जाएगा।
विज्ञापन


ओंकारेश्वर में 1989 से चली आ रही परंपरा
भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग की पावन नगरी से जुड़ा यह आयोजन जय मां नर्मदा युवा संगठन द्वारा वर्ष 1989 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। बीते तीन दशकों से अधिक समय से यह आयोजन नर्मदा भक्तों के लिए आस्था का महापर्व बन चुका है। इस वर्ष भी सैकड़ों स्वयंसेवक एवं नर्मदा सेवक आयोजन को भव्य रूप देने में जुटे हुए हैं।

प्रशासनिक निरीक्षण, व्यवस्थाओं का जायजा
मां नर्मदा जयंती को लेकर खरगोन जिले के नवघाट खेड़ी एवं सुंदर धाम आश्रम में होने वाले आयोजनों की तैयारियों का जायजा लेने प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मंच निर्माण, घाटों की स्थिति, पार्किंग व्यवस्था, यातायात प्रबंधन एवं सुरक्षा इंतजामों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि नर्मदा का जलस्तर आयोजन स्थल के अत्यंत समीप पहुंच चुका है, जिससे मंच निर्माण एवं अन्य व्यवस्थाओं में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।
विज्ञापन


जलस्तर को लेकर समिति का आक्रोश
इस संदर्भ में मैकल सेवा समिति के सदस्य रवि जैन ने प्रशासन के समक्ष चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि नर्मदा जयंती आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए ओंकारेश्वर बांध प्रबंधन को जलस्तर नियंत्रित करने हेतु पूर्व में पत्र लिखा गया था, किंतु एनएचडीसी की लापरवाही के कारण अब तक जलस्तर नियंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सप्तदिवसीय आयोजन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु घाट पर पहुंचते हैं, भजन-कीर्तन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। यदि इसी प्रकार जलस्तर बढ़ता रहा तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। समिति ने मांग की है कि दो टरबाइन चलाकर जलस्तर को नियंत्रित किया जाए, ताकि आयोजन सुरक्षित रूप से सम्पन्न हो सके।

ये भी पढ़ें- क्या कटनी है खनिजों का नया गढ़? सोने के बाद कोयले के भंडार ने बढ़ाई शान, जानें कौन सी है ये क्वालिटी

प्रशासन ने लिया संज्ञान
बड़वाह एसडीएम सत्यनारायण दर्रे ने बताया कि निरीक्षण के दौरान जलस्तर बढ़ा हुआ पाया गया है, जिससे समिति को कार्य करने में कठिनाई आ रही है। इस संबंध में खरगोन खंडवा कलेक्टर  को अवगत करा दिया गया है तथा खंडवा कलेक्टर को एडीएम के माध्यम से पत्र प्रेषित किया जा चुका है।

सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था सुदृढ़
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़वाह एसडीओपी अर्चना रावत ने बताया कि आयोजन के दौरान पुलिस के विशेष पॉइंट्स लगाए जाएंगे। घाटों पर स्थानीय गोताखोरों के साथ होमगार्ड जवान तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 23 एवं 25 जनवरी को श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक रहने की संभावना को देखते हुए आवश्यकतानुसार ट्रैफिक बदलाव  किया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

सुंदर धाम आश्रम में भी तैयारियां
निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने सुंदर धाम आश्रम पहुंचकर वहां होने वाले नर्मदा जयंती आयोजन की तैयारियों का जायजा लिया। आयोजन संयोजक महंत श्री नारायण दास जी महाराज ने भी अधिकारियों का ध्यान बढ़ते जलस्तर की समस्या की ओर आकर्षित किया और शीघ्र समाधान की मांग की। निरीक्षण के दौरान एसडीएम सत्यनारायण दर्रे, एसडीओपी अर्चना रावत, तहसीलदार शिवराम कनासे, थाना प्रभारी बलराम सिंह राठौर, जनपद सीईओ मुकेश जैन सहित समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
विज्ञापन


आस्था, प्रशासन और सुरक्षा का संगम
मां नर्मदा जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और जनसहभागिता का प्रतीक है। श्रद्धालुओं की भावनाओं और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जलस्तर नियंत्रण, व्यवस्थाओं की पूर्णता और प्रशासनिक समन्वय अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह महापर्व श्रद्धा और सुरक्षित वातावरण में सम्पन्न हो सके।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें