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कभी शाही गेस्ट हाउस, सेना का मुख्यालय, तो कभी रहा विधानसभा, अब ऐसा है भव्य मिंटो हॉल का नजारा

Tue, 02 Oct 2018 10:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
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मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित है मिंटो हॉल। जिसके शान की कहानी शुरू हुई थी 1909 में। यह अंग्रेजी हुकूमत, नवाबी शासन और लोकतंत्र के शासन का साक्षी रह चुका है। राज्य सरकार ने इसका जीर्णोद्धार (रीस्टोर) किया है। अब यह अद्भुत भवन पहले से भी खास लगता है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी मिंटो हॉल को अद्भुत और अभूतपूर्व इमारत बताया। उन्होंने कहा कि इस इमारत से उनकी काफी यादें जुड़ी हुई हैं। इसकी विरासत को सहेजकर रखा जाएगा।
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आज भी दिखता है पुराना स्वरूप

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आज भी इस इमारत को देखकर इसका पुराना स्वरूप दिखता है। अंग्रेजी इंजीनियर एसी रबेन की देखरेख में तैयार हुए इस भवन के मूल स्वरूप में बिना परिवर्तन किए इसका जीर्णोद्धार किया गया है। सीएम ने कहा कि राज्य के इतिहास के साथ ही इस भवन का भी इतिहास जुड़ा हुआ है।
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बनने में लगे थे 24 साल

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उस समय करीब 3 लाख रुपये में ये भवन बनाया गया। इसे बनाने में 24 सालों का समय लगा। अब इसका जीर्णोद्धार करने में 65 करोड़ रुपये लगे हैं।   

एक समय पर खो दी थी चमक

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सीएम का कहना है कि शून्य से सृष्टि पैदा की जाती है और इसका यह भवन उदाहरण है। इसने अपनी चमक खो दी थी लेकिन दोबारा इसका स्वरूप लौटाया गया है। अब इसे सहेजकर रखना होगा।
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ब्रिटिश साम्राज्ञी के क्राउन के आकार की तरह है भवन

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भव्य भवन का नाम तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड मिंटो के नाम पर रखा गया था। भवन का आकार ब्रिटिश साम्राज्ञी के क्राउन की तरह है।
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दोबारा हुआ पुनर्जीवित

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साल 2014 में मिंटो हॉल को संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पर्यटन निगम को सौंपा गया। इसे मूल स्वरूप में पुनर्जीवित किया गया है। यहां 1100 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। भोपाल की तत्कालीन शासक नवाब सुल्तान जहां बेगम के समय में बनी इस इमारत का इस्तेमाल गेस्ट हाउस में कम हुआ और राज्य की सेना के मुख्यालय, आर्थिक सलाहकार के दफ्तर, पुलिस मुख्यालय और होटल के रूप में अधिक हुआ।
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जब भवन बना विधानसभा केंद्र

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1 नवंबर, साल 1956 को मध्यप्रदेश के गठन के बाद इसे विधानसभा भवन बनाया गया। लेकिन साल 1996 में एक नया भवन बनाया गया और प्रदेश की विधानसभा वहां शिफ्ट कर दी गई। तभी ये भवन खाली पड़ा था।

होटल बनाने की घोषणा भी हुई

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भवन को खाली देखते हुए इसे होटल बनाने की घोषणा भी की गई लेकिन स्थानीय लोगों ने इस बात का विरोध किया। जिसके बाद इसे होटल का स्वरूप नहीं दिया गया। अब इस हॉल की पुरानी रौनक फिर से लौट आई है। इसके ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप को बरकरार रखते हुए इसे कन्वेंशन सेंटर के रूप में विकसित किया गया है।

नई तकनीकों से लेस हुआ भवन

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मिंटो हॉल को अब नई तकनीकों से लेस किया गया है। यहां लिफ्ट भी लगाई गई है। मुख्य हॉल के साथ ऑडिटोरियम, कमेटी कक्ष, मीडिया कक्ष भी बनाया गया है। इसके साथ ही कन्वेंशन सेंटर में अत्याधुनिक ऑडियो वीडियो सिस्टम, फायर फाइटिंग और आधुनिक एयर कंडीशन लगाए गए हैं।

मूल पेंटिंग हैं यथावत

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भवन की दीवारों पर मूल पेंटिंग्स को यथावत रखा गया है। जरदोरी पेंटिंग्स, सभा कक्ष, हॉल का इंटीरियर वास्तु शास्त्र के आधार पर किया गया है। इसकी रौनक अब फिर से लौट आई है।  
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