मध्यप्रदेश में संपत्ति का ब्यौरा देने में आनाकानी करने वाले आईएएस अफसरों से सरकार तंग आ चुकी है। अब ऐसे अफसरों को चौदह फरवरी तक ब्यौरा सरकार को उपलब्ध कराने की सख्त चेतवानी दी जा चुकी है। अभी तक तीन दर्जन से अधिक अफसरों ने संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है।
इतना ही नहीं, जिन अफसरों के ब्यौरे आए भी हैं उनमें लगभग सवा सौ अफसरों का ब्यौरा तय फॉर्मेट में नहीं है या उसमें कुछ गलतियां हैं। सरकार इनकी जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि ऐसी स्थिति में सरकार द्वारा संपत्ति का ब्यौरा नहीं देने वाले अफसरों का विजिलेंस क्लीयरेंस या पदोन्नति रोके जाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन फिर भी अफसर ब्यौरा देने में लापरवाही बरत रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, कई अफसरों ने खुद की संपत्ति को 'निल' बताया है। इनमें लगभग एक दर्जन बड़े अफसर शामिल हैं। इनके ब्यौरे में मकान का जिक्र भी नहीं किया गया है। इसके पहले भी कई वरिष्ठ अफसर अपनी संपत्ति का ब्यौरा 'निल' बताते रहे हैं।
प्रशासन द्वारा हर अफसर के संपत्ति ब्यौरे का मिलान उनके पिछले साल के ब्यौरे से किया जा रहा है। मालूम हो कि अफसरों को हर साल जनवरी में संपत्ति ब्यौरा देना होता है। ब्यौरा नहीं देने पर कारर्वाइयों का प्रावधान है और केंद्र भी इस दिशा में कडे़ निर्देश जारी कर चुका है। लेकिन अक्सर ऐसे मामलों में सरकारें कुछ कर नहीं पातीं।