मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर लगाई गई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई नहीं हो सकी। अब 17 जनवरी की तारीख तय की गई है। कोर्ट की ओर से बताया गया कि इस मामले में लगी अलग-अलग याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई होगी।
जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को पंचायत चुनावों में ओबीसी के लिए रिजर्व पदों पर चुनाव कराने से रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार ने पुनर्विचार याचिका लगाई है, जिस पर आज सुप्रीमकोर्ट के समक्ष सीरियल क्रमांक 73 पर जस्टिस खानविलकर की खंडपीठ में सुनवाई होना थी। इसी मसले पर केंद्र सरकार ने भी याचिका दायर कर रखी है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई को 17 जनवरी तक के लिए टाल दिया।
सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार की ओर से वकील हरीश साल्वे और केंद्र सरकार की ओर से तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में मौजूद रहे, वहीं ओबीसी संगठनों की ओर से रामेश्वर सिंह ठाकुर, वरुण चौपड़ा, सिद्धांत गुप्ता, संतोष पॉल श्रीहर्ष आदि अधिवक्ता उपस्थित थे, लेकिन सुनवाई नहीं हो पाई। एमपी कांग्रेस नेता सैयद जाफर ने ट्वीट कर बताया है कि पंचायत चुनाव के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 17 जनवरी 2022 को सुनवाई की तारीख तय की है।
बता दे कि हाल ही में मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी की नीति रही है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। सामाजिक न्याय, समाजिक समरता के साथ सब समाज को लेकर आगे बढ़ते जाना है। सामान्य वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण मध्य प्रदेश में लागू किया गया है। अनुसूचित जाति जनजाति को भी न्याय दिया। OBC आरक्षण को भी पंचायत चुनाव में अधिकार है, इसलिए हम कोशिश कर रहे हैं कि सबको न्याय मिले।
संगठन भी सड़क पर उतरे, सियासत भी जारी
ओबीसी संगठनों ने ओबीसी आरक्षण के खत्म होने के बाद 2 जनवरी को भोपाल में सीएम हाउस घेरने की चेतावनी दी थी, जिसकी पुलिस व प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी। इससे रविवार को भोपाल में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और शहर के सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस ने आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया था। आंदोलन में ओबीसी के अलावा एससी, एसटी से जुड़े संगठन भी उतर आए थे। भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण भी भोपाल पहुंचे थे जिन्हें भोपाल एयरपोर्ट पर रोक लिया गया था और वे रात को वापस दिल्ली चले गए थे। मामले में कांग्रेस की ओर से सरकार पर लगातार हमले किए गए। उन्होंने आंदोलन को कुचलने का भी आरोप लगाया था।