शिवराज सिंह चौहान ने टोपी पहनी, तिलक लगाया और मध्य प्रदेश में लगातार तीसरी बार जीत भी दर्ज की।
चुनाव नतीजे आने के बाद जब वे मीडिया से मुखातिब हुए तो उन्होंने अपनी जीत राज्य की जनता को समर्पित की, लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज को धन्यवाद दिया। उन्होंने जीत का श्रेय संगठन और कार्यकर्ताओं को दिया।
उन्होंने कहा कि मेरी जगह कोई और नेता होता तो भी भाजपा ही मध्य प्रदेश में जीतती।
शिवराज की धन्यवाद की फेहरिस्त में उनकी चिर प्रतिद्वंद्वी उमा भारती का नाम भी शामिल था और नरेंद्र मोदी का भी। आश्चर्यजनक रूप में मोदी का नाम इस फेहरिस्त में सबसे पीछे था।
हालांकि शिवराज ने कहा कि अब दिल्ली दूर नहीं है और पार्टी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा को चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार बनान में वे मध्य प्रदेश से सर्वाधिक सीटों को योगदान देने की कोशिश करेंगे।
फिर छिड़ सकती है मोदी बनाम शिवराज की बहस
आज की प्रेस कांफ्रेंस में शिवराज ने मोदी का नेतृत्व स्वीकार तो कर लिया लेकिन संभावना है कि मध्य प्रदेश में लगातार तीसरी जीत के बाद एक बार फिर नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान के व्यक्तित्व और नेतृत्व की तुलना शुरू हो सकती है।
इन विधान सभा चुनाव में भाजपा ने चारो राज्यों में जीत हासिल की है, लेकिन दिल्ली में 'आप' ने दूसरे नंबर की पार्टी बनकर इस दावे को कमजोर कर दिया कि देश में मोदी की लहर चल रही है।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत ने भी मोदी के करिश्मे के बजाय कांग्रेस की गुटबाजी की ओर अधिक इशारा किया। वहां कई सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर रही।
विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस ने आंतरिक गुटबाजी के कारण ये राज्य गंवा दिया। खुद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार चरणदास महंत ने कहा कि उनकी पार्टी के 27 निवर्तमान विधायक भितरघात के कारण हार गए।
अंतिम परिणाम आने तक रुझानों का पलड़ा जिस प्रकार कांग्रेस और भाजपा के बीच झूलता रहा, उसने रमन सिंह की जीत का स्वाद फीका कर दिया। राज्य के चुनाव प्रचारों में जिस प्रकार पोस्टरों पर नरेंद्र मोदी तस्वीर बड़ी और रमन सिंह की छोटी हुई थी, भाजपा ने वहां भी बड़ी जीत की उम्मीद लगाई थी। लेकिन रमन इस जीत के लिए मोदी के करीश्मे से अधिक कांग्रेस के भितरघात को श्रेय देना चाहेंगे।
मध्य प्रदेश में वैसे तो अंतिम तीन दिनों में मोदी ने 14 रैलियां लेकिन शिवराज सिंह चौहान ने शुरुआती दिनों में उन्हें चुनाव प्रचार से दूर ही रखा। मोदी कई दिनों तक शिवराज के पोस्टरों से भी गायब रहे।
आडवाणी को दिखती है शिवराज में वाजपेयी की छवि
गोवा की बैठक में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया गया तो विरोध का सबसे तीखा सुर आडवाणी ने छेड़ा। आडवाणी ने मोदी की कटटर छवि की बरअक्स उदार छवि के व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की वकालत की। हालांकि भाजपा ने आडवाणी के सुरों को तवज्जो नहीं दिया।
आडवाणी ने फिर भी पार्टी के भीतर मोदी बनाम शिवराज की बहस छेड़ने की कोशिश की। आडवाणी ने विकास के मामले मे मोदी और शिवराज की तुलना की। उन्होंने कहा कि मुझे शिवराज में अटल बिहारी वाजपेयी की छवि दिखती है।
शिवराज ने आडवाणी के बयानों के मुताबिक ही अपनी उदार छवि बनाने की कोशिश की। उन्होंने ईद पर टोपी भी पहनी मध्य प्रदेश में 'मामा' की छवि भी गढ़ी।
अब लगातार तीसरी जीत के बाद शिवराज की ये छवि ही भाजपा के लिए सहयोगियों को लुभाने का साधन बन सकता है। भाजपा ने मोदी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर रखा है। अब ये देखना दिलचस्प होगा की तीन जीत के बल पर मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना चुकी भाजपा तीन जीत दर्ज करने वाले शिवराज को कैसे खारिज करती है। वो भी तब जब गुजरात में लोकसभा की 26 सीटें हैं और मध्य प्रदेश में 29।