मध्यप्रदेश बच्चियों और औरतों से बलात्कार के मामले में देश में पहले नंबर पर है। पिछले साल मध्यप्रदेश में 2,467 बच्चियों के साथ रेप की घटनाएं दर्ज हुईं, जो की देशभर में बच्चियों के साथ
हुई रेप की वारदातों की कुल संख्या का आधा है। इनमें से 90 फीसदी मामलों में परिवार का कोई सदस्य या फिर कोई नजदीकी वारदात का आरोपी था।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश सिर्फ बलात्कार के मामलों में आगे होने के लिए कुख्यात नहीं है, बल्कि कथित तौर पर नाबालिगों द्वारा किए गए
रेप के मामलों में भी सबसे आगे है। साल 2016 में नाबालिगों के खिलाफ मध्यप्रदेश में 442 रेप केस दर्ज किए गए, जबकि महाराष्ट्र में 258 और राजस्थान में 159 रेप केस दर्ज हुए।
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एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में महिलाओं के साथ बलात्कार के 4,882 केस दर्ज हुए और इस मामले में भी दूसरे राज्यों से सबसे आगे था। वहीं उत्तर प्रदेश 4816 और
महाराष्ट्र 4189 रेप केस के आंकड़ों के साथ महिलाओं से रेप के मामले में देश में दूसरे और तीसरे नंबर पर था।
हमारे बच्चें कितने असुरक्षित हैं इस तथ्य को आंकड़े बयां करते हैं। मध्यप्रदेश में पिछले साल रोजाना कम से कम 37 बच्चे भयंकर अपराधों के शिकार बने। एनसीआरबी के ताजा आंकड़ें
बताते हैं कि 2016 में राज्य में बच्चों के खिलाफ कुल 13,746 अपराध की घटनाएं दर्ज की गईं। उत्तर प्रदेश में 16,079 और महाराष्ट्र में 14,559 घटनाओं के बाद मध्यप्रदेश देश में तीसरे स्थान
पर था।