मध्य प्रदेश के दमोह में चर्च पास्टर द्वारा बच्चियों से छेड़छाड़ का मामला राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग तक पहुंच गया है। राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने एमपी डीजीपी और दमोह पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किया है। सात दिन में उनसे जवाब मांगा गया है। उन्होंने ट्वीट भी करते हुए इस बात का उल्लेख किया है।
बता दें कि प्रियंक कानूनगो ने ट्वीट में लिखा है कि मध्यप्रदेश के दमोह जिले में चर्च पास्टर द्वारा बच्चियों के साथ छेड़छाड़ के मामले की शिकायत मिली है। शिकायतकर्ता ने बताया कि बच्चों को देर रात तक थाने में जांच के नाम पर रोका गया और FIR दर्ज नहीं की गई। ये पॉक्सो का उल्लंघन प्रतीत हो रहा है।
यहां बता दें कि दमोह जिले में प्रोटेस्टेंट वर्ग की दो ईसाई मिशनरी काम कर रही हैं। एक मिशनरी दमोह से संचालित हो रही है, दूसरी मिशनरी केरल से संचालित हो रही है। दूसरा ग्रुप केरल से संचालित है, जो मढ़ाहार में अपना एक कार्यालय संचालित करता है। दलित समाज के सात लोगों ने इस केंद्र का खुलासा किया था और तीन बार एसपी को आवेदन दिया गया। इसके बाद सीएसपी कार्यालय में बयान दर्ज कर लिए गए, जहां बच्चियों ने चर्च पास्टर पर छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं इन बच्चियों के बयान के लिए रात में थाने में बिठाया गया है। इसकी शिकायत मिलने पर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने मंगलवार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।