क्या है मामला?
दो जनवरी को आरोपी अजय ने बच्ची का अपहरण कर लिया था, उसके लापता होने के बाद परिवार ने तलाश शुरू की। पूरे गांव में तलाशने के बाद भी बच्ची नहीं मिली, इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और बच्ची की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को अजय पर संदेह हुआ तो उसे हिरासत में लिया गया। पुलिस पूछताछ में अजय ने बताया कि उसने झाड़ियों में ले जाकर बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। उसके रोने और चिल्लाने पर मुंह दबाकर हत्या कर दी। बाद में शव को झाड़ियों में फेंक दिया।
आरोपी के जुर्म कबूलने के बाद पुलिस ने सबूत जुटाए और 13 जनवरी को कोर्ट में चालान पेश किया। दो महीने 28 दिन (88 दिन) चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने गवाहों, सबूत और डीएनए रिपोर्ट के आधार पर आरोपी अजय को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। साथ ही 3000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। कोर्ट की ओर से पीड़िता के परिवार को चार लाख रुपये देने का भी आदेश दिया गया है। दोषी अजय को सजा सुनाते हुए न्यायाधीश तबस्सुम खान ने एक भावुक कविता भी लिखी।
ये भी पढ़ें:
प्रदीप मिश्रा की कथा और भगदड़ का पुराना नाता, चार साल में छह हादसे, कई घायल; एक की मौत
पढ़िए, न्यायाधीश तबस्सुम खान की कविता...
2 से 3 जनवरी 2025 की थी वो दरमियानी रात, जब कोई नहीं था मेरे साथ।
इठलाती, नाचती छह साल की परी थी, मैं अपने मम्मी-पापा की लाड़ली थी।
सुला दिया था उस रात बड़े प्यार से मां ने मुझे घर पर, पता नहीं था नींद में मुझे ले जाएगा। 'वो' मौत का साया बनकर।
जब नींद से जागी तो बहुत अकेली और डरी थी मैं, सिसकियां ले लेकर मम्मी-पापा को याद बहुत करी थी मैं।
न जाने क्या-क्या किया मेरे साथ, मैं चीखती थी, चिल्लाती थी, लेकिन किसी ने न सुनी मेरी आवाज।
थी गुड़ियों से खेलने की उम्र मेरी, पर उसने मुझे खिलौना बना दिया।
'वो' भी तो था तीन बच्चों का पिता, फिर मुझे क्यों किया अपनों से जुदा।
खेल खेलकर मुझे तोड़ दिया, फिर मेरा मुंह दबाकर, मरता हुआ झाड़ियों में छोड़ दिया।
हां मैं हूं निर्भया, हां फिर एक निर्भया, एक छोटा सा प्रश्न उठा रही हूं
जो नारी का अपमान करे, क्या वो मर्द हो सकता है, क्या जो इंसाफ निर्भया को मिला, वह मुझे मिल सकता है।